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Kannauj News: गंगा खतरे के निशान से 2.39 मीटर दूर

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कन्नौज। गंगा ने अभी खतरे का निशान नहीं छुआ है लेकिन उसकी बढ़ती चाल ने तटीय इलाकों में हलचल बढ़ा दी है। बुधवार दोपहर दो बजे जारी आंकड़ों के अनुसार महादेवी घाट पर गंगा का जलस्तर 123.580 मीटर दर्ज किया गया। 24 घंटे में नदी का जलस्तर 0.010 मीटर बढ़ा है। गंगा अभी खतरे के निशान 125.970 मीटर से 2.39 मीटर नीचे बह रही है। बढ़ते पानी ने नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क कर दिया है। उधर, घाटों की सीढ़ियां इन दिनों गंगा के मिजाज की गवाह बनी हैं।
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मानसून की बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहे पानी का असर अब गंगा पर दिखाई देने लगा है। चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज से 47,336 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। गंगा किनारे बसे कासिमपुर, कटरी गंगपुर अन्य गांवों में ग्रामीणों की नजर अब नदी की हर गतिविधि पर है। सुबह और शाम घाटों पर लोगों की भीड़ जलस्तर देखने पहुंच रही है। किसान भी अपनी फसलों और खेतों को लेकर सतर्क हैं।
हालांकि, फिलहाल बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। राजस्व, नहर, आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे अनावश्यक भीड़ न लगाने और बच्चों को अकेले घाटों पर न भेजने की अपील की है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में गंगा की रफ्तार और तेज हो सकती है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी जय लक्ष्मी पांडेय का कहना है कि अभी गंगा में बाढ़ की स्थिति नहीं है। जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। सभी संबंधित विभाग अलर्ट मोड में हैं और किसी भी परिस्थिति से निपटने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
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फोटो :25: बाढ़ से प्रभावित होने वाले इलाकों का निरीक्षण करते सैन्य व जिले के अफसर। स्रोत : विभाग
बाढ़ से पहले सेना ने टटोले रास्ते
कन्नौज। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन ने बुधवार को तैयारी तेज कर दी हैं। इसी क्रम में फतेहगढ़ स्थित राजपूत रेजीमेंटल सेंटर (आरआरसी) की आपदा राहत टुकड़ी के मेजर व जेसीओ समेत कई सैन्य अधिकारी कन्नौज पहुंचे। टीम ने महादेवी घाट, गंगा तटीय क्षेत्रों और संभावित रूप से प्रभावित होने वाले गांवों का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी का जायजा लिया।
सैन्य अधिकारियों ने उन संपर्क मार्गों को भी देखा, जिनसे आपदा की स्थिति में राहत दल और जरूरी संसाधन प्रभावित गांवों तक पहुंचाए जा सकें। कई स्थानों पर पहुंचने लिए मार्गों की स्थिति का आकलन किया गया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि यदि बाढ़ का पानी बढ़ता है तो किन रास्तों का उपयोग राहत कार्यों के लिए किया जा सकता है। साथ ही कलक्ट्रेट में एडीएम देवेंद्र सिंह के साथ बैठक भी हुई। बैठक में सेना, प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने संभावित बाढ़ की स्थिति में समन्वय, राहत सामग्री की उपलब्धता, बचाव उपकरणों और त्वरित कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा की। अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य केवल इतना है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो लोगों तक मदद पहुंचाने में एक पल की भी देरी न हो।
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