तालग्राम। रमजान माह के दसवें रोजे के साथ पहला अशरा यानी रहमत का दौर समाप्त हो गया है। शनिवार सूरज डूबते ही इफ्तार के साथ रोजेदारों ने जमकर दुआएं कीं। पहला अशरा रहमत का माना गया है। रविवार को ग्यारहवें रोजे से दूसरा अशरा शुरू होगा, जिसे मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का दौर कहा जाता है।
गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें
कस्बा के हाजी इरशाद अली का कहना है कि रमजान में तीन असरे हैं। पहला रहमत है। दूसरे असरे में रोजेदार अपने छोटे-बड़े गुनाहों की तौबा करते हैं और अल्लाह से माफी मांगते हैं। इस दौर में की गई इबादत और सच्चे दिल से की गई दुआओं को अल्लाह कबूल करते हैं।
शिक्षक कमर हुसैन ने बताया कि मगफिरत के असरे में गुनाहों की माफी के लिए तौबा करनी चाहिए। अल्लाह से अपनी गलतियों के लिए सच्चे दिल से दुआ करें। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें। कुरआन की तिलावत करें और इबादत में अधिक समय दें।