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Kannauj News: विस्फोट के आरोपी के मकान का स्वामित्व तय करेगा आकार पत्र 23

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छिबरामऊ। बहवलपुर में अवैध आतिशबाजी फैक्ट्री में हुए धमाके में एक ग्रामीण की मौत हो गई थी। हादसे के बाद शुरू हुई जांच में प्रशासन ने फैक्टरी संचालक शिवकुमार भुर्जी की मकान व उस जमीन की जांच शुरू कर दी है, जिस पर अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी। पैमाइश में यह बात सामने आई थी, कि शिवकुमार भुर्जी का मकान व आतिशबाजी फैक्ट्री निजी आराजी है, जो राजस्व अभिलेखों में बहवलपुर निवासी रामसिंह डंबर के नाम दर्ज है, लेकिन गांव का राजस्व रिकार्ड जला होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। अब चकबंदी विभाग ने स्थिति को साफ करने के लिए आकार पत्र 23 की तलाश शुरू कर दी है।
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चकबंदी कानूनगो अजय कुमार, रामकिशन, बसंत कुमार व चकबंदी लेखपाल रोनेश व अरविंद पैमाइश के लिए गांव पहुंचे थे। यहां टीम ने गाटा संख्या 220 की पैमाइश की, जिसमें शिवकुमार भुर्जी का मकान बना है। 32 डिसमिल का यह गाटा राजस्व रिकार्ड में रामसिंह डंबर के नाम दर्ज है। इस जमीन में शिवकुमार भुर्जी का मकान कैसे बना, यह प्रश्न लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। लोगों का कहना था कि राम सिंह डंबर को उड़ान चक दिया गया था, उसके बाद यह जमीन आबादी की श्रेणी में दर्ज हो गई थी।
चकबंदी कानूनगो अजय कुमार की माने तो रामसिंह डंबर को उड़ान चक मिलने की स्थिति आकार पत्र 23 मिलने के बाद ही साफ हो पाएगी। छिबरामऊ तहसील स्तर पर यह अभिलेख उपलब्ध नहीं है। जिला मुख्यालय स्थित अभिलेखागार में मौजूद होने की संभावना है।
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न ही दान में दी गई थी और ही किया गया था जमीन का बैनामा
जांच के दौरान मौजूद पूर्व सभासद जयप्रकाश सक्सेना ने बताया कि शिवकुमार भुर्जी का जिस जमीन पर मकान बना है, उसका न तो बैनामा है और न ही दान में दी गई थी। वर्तमान सभासद सत्येंद्र शाक्य ने कहना है कि शिवकुमार भुर्जी का मकान नगर पालिका में भी दर्ज नहीं है। बहरहाल बहवलपुर के लोग अब तक गांव में आतिशबाजी के विस्फोट में हुई कई मौतों के जिम्मेदार शिवकुमार भुर्जी की जमीन की पूरी तरह साफ तस्वीर देखने के लिए प्रशासन की ओर निहार रहे हैं।

पुलिस के हत्थे अब तक नहीं चढ़ पाया तीसरा आरोपी
बता दें कि 22 सितंबर की सुबह 11 बजे बहवलपुर गांव आतिशबाजी फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट से दहल गया था। इस विस्फोट में गांव के ही शिवकुमार चिक बुरी तरह से झुलस गया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने शिवकुमार भुर्जी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके पुत्र संतोष भुर्जी और महेश भुर्जी मौके से भाग गए थे। मशक्कत के बाद पुलिस संतोष को गिरफ्तार कर जेल भिजवा चुकी है, जबकि महेश अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर बना हुआ है।
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