कन्नौज। पौधे आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र हैं। धर्म व संस्कृति के साथ ही मानव जीवन में पौधों का विशेष स्थान रहा है। इसी को ध्यान में रखकर इस बार वन विभाग आध्यात्मिक महत्व वाले पौधों को लगाने की तैयारी कर रहा है। किसानों व निजी संस्थाओं को प्रेरित कर पंचवटी, नवग्रह और हरिशंकरी वाटिका बनाई जाएगी। यहां ऐसे पौधे रोपे जाएंगे, जिनका धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व है।
शासन के निर्देश पर जिले में इस बार बरसात के मौसम में 19 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे। अभियान के तहत वन विभाग आध्यात्मिक महत्व के पौधों के गुणों और पौराणिक काल में इनकी विशेषता बताकर किसानों व निजी संस्थाओं से ऐसे करीब 50 हजार पौधे लगवाएगा। वन विभाग आध्यात्मिक महत्व के पौधों को मुहैया कराने के साथ ही देखभाल का भी प्रशिक्षण देगा। खासतौर पर लोगों को नवग्रह, पंचवटी और हरिशंकरी वाटिका बनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। जिला वन अधिकारी जवाहर लाल गुप्ता ने बताया कि बारिश के साथ ही वन विभाग ने पौधरोपण अभियान शुरू कर दिया है। इस बार वन विभाग की कुछ खास योजनाएं हैं। वन विभाग की ओर से किसानों, निजी संस्थाओं और धार्मिक स्थलों की भूमि पर स्वीकृति के बाद आध्यात्मिक महत्व वाले पौधे लगाए जाएंगे। यह वातावरण के साथ ही मानव जीवन के लिए भी फायदेमंद होंगे।
नवग्रह वाटिका
नवग्रह वाटिका का संबंध ग्रह नक्षत्र से है। वाटिका तैयार करने में मदार का पौधा मध्य में होता है। इसमें मदार सूर्य, पलाश सोम, गूलर मंगल, अपामार्ग बुध, पीपल गुरु, बरगद शुक्र, शमी शनि, दूब राहु, कुश केतु का नेतृत्व करने वाले पौधे लगाए जाएंगे।
पंचवटी वाटिका
पंचवटी में सभी पौधों की बीच से बराबर की दूरी होती है। बीच में एक कुंड बनता है। हिंदू धर्म के अनुसार इसमें हवन, पूजन किया जाना अनिवार्य होता है। बिना हवन के इन पौधों का आध्यात्मिक महत्व नहीं होता है। पौधे दिशा यानी पीपल पूर्व, बरगद पश्चिम, बेल उत्तर, आंवला दक्षिण, अशोक अग्नेय (दक्षिण-पूर्व) में लगेगा।
हरिशंकरी वाटिका
हरिशंकरी वाटिका में पीपल, बरगद, पाकड़ पौधों को एक ही गड्ढे में एक साथ लगाया जाता है। कुछ लोग इन पौधों को लगाने की मनौती करते हैं। मनौती पूरी होने पर यह पौधे लगाते हैं। इसका पौराणिक काल में वर्णन मिलता है। यह वाटिका हर मनोकामना पूर्ण करने वाली होती है।