गुरसहायगंज (कन्नौज)। अलीपुर जलेसर गांव में तंत्र क्रिया के दौरान एक युवक की मौत के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को दो तांत्रिकों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुट गई है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मृतक रवींद्र (24) हाइड्रोसिफेलस (मस्तिष्क में पानी आना) की बीमारी से पीड़ित था, जिसका न्यूरोलॉजिस्ट से इलाज चल रहा था।
कोतवाली क्षेत्र के अलीपुर जलेसर गांव में बुधवार शाम को बीमार रवींद्र को छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सुतियानी निवासी तांत्रिक हरिश्चंद्र और राजसिंह गंगा किनारे ले गए। उन्होंने भूत-प्रेत का साया भगाने के नाम पर युवक को पीटा और गंगा में डुबकी लगवाई। रवींद्र जब अचेत हो गया तो वे उसे घर ले आए और देर रात तक झाड़-फूंक करते रहे। युवक में जब कोई हरकत नहीं हुई तो दोनों तांत्रिक उसका शव घर के बाहर रखकर भाग गए। तब परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आंख व छाती में चोटें मिलने और पानी में डूबने से मौत की पुष्टि हुई। भाई वीरेंद्र की तहरीर पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। भाई ने बताया कि रवींद्र को एक सप्ताह से सिरदर्द था और उसका इलाज भी चल रहा था। कुछ लोगों के कहने पर तीन फरवरी को तांत्रिकों को बुलाया गया था।
तांत्रिकता का अंधा कारोबार
इलाके में तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के नाम पर अंधविश्वास का कारोबार आज भी फल-फूल रहा है। कई तांत्रिक चिकित्सा विज्ञान को मजाक बताते हुए दैवीय शक्तियों से चमत्कार करने का दावा करते हैं। रवींद्र की मौत इस अंधविश्वास का एक दुखद उदाहरण है।
शादी की तैयारी कर रहा था रवींद्र
रवींद्र की शादी अप्रैल में होने वाली थी। परिवार ने उसका रिश्ता तय कर दिया था। इससे पहले वह सिरदर्द की बीमारी का शिकार हो गया और झाड़-फूंक के चक्कर में जान गवां बैठा। परिवार में उसके दो भाई सुरेंद्र और वीरेंद्र हैं, जो खेती व मजदूरी करते हैं।
12 हजार रुपये वसूले, शराब भी मंगाई
भाई वीरेंद्र ने बताया कि तंत्र क्रिया के लिए तांत्रिक हरिश्चंद्र व राज सिंह ने 12 हजार रुपये लिए थे और पूजन सामग्री के साथ शराब भी मंगाई थी। झाड़-फूंक के दौरान रवींद्र के तीनों भतीजे, मझले भाई वीरेंद्र के पुत्र हिमांशु (9), शोभित (7), दिवांशु (6) पास ही खेत में बकरियां चरा रहे थे। जैसे ही तांत्रिकों ने रवींद्र की पिटाई शुरू की, बच्चों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन डर के माहौल में उन्हें चुप करा दिया गया। फिर डर का ऐसा माहौल बना कि बच्चे चाचा को तड़पता देखते रहे पर कुछ कर नहीं सके।