नैफेड केंद्र पर किसानों के गेहूं की होती तौल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
चार दिन से खुले बाजार में गेहूं की कीमतों में करीब 125 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आई गिरावट के बाद अब किसानों का रुख सरकारी खरीद केंद्रों की ओर मुड़ गया है। गुरुवार को कस्बे के मंडी समिति परिसर में स्थित चार सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों की भीड़ लगी रही। उधर, सरकारी दरों व मार्केट की दरों में भारी अंतर को देखते हुए बैक डोर से क्रय केंद्र प्रभारियों व गल्ला आढ़तियों का खेल भी शुरू हो गया है।
मंडी समिति परिसर में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए जिला प्रशासन ने चार केंद्र खोल रखे हैं। इनमें एक केंद्र नैफेड का है। दूसरा उपभोक्ता सहकारी संघ का है। तीसरा आरएफसी व चौथा एफसीआई का केंद्र है। इन चारों केंद्रों को जिला प्रशासन ने 40-40 हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया है। अभी तक सरकारी रेट व मार्केट रेट एक ही होने के कारण सरकारी केंद्रों पर खरीद नाममात्र को हुई।
चार दिनों से मार्केट रेट 1475 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल का रह गया है। इसके विपरीत सरकारी केंद्रों पर 1625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों का गेहूं खरीदा जा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारियों के आंकड़ों के मुताबिक बाजार में दाम गिरने के बाद चार दिन में तीन केंद्रों पर करीब छह हजार क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। सहकारी उपभोक्ता संघ के केंद्र पर केंद्र प्रभारी व कर्मचारियों के न मिलने से इस केंद्र का खरीद का आंकड़ा पता नहीं चला।
चार दिन में खरीदा गया छह हजार क्विंटल गेहूं
तिर्वा। नैफेड केंद्र प्रभारी रमन कुमार ने बताया कि 40 हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है। 20 जून तक खरीद होनी है। गुरुवार तक करीब 2500 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है, सबसे अधिक खरीद पिछले चार दिनों के दौरान हुई है। आरएफसी केंद्र के प्रभारी गजेंद्र वर्मा ने बताया कि उनके केंद्र पर तीन हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। दो हजार क्विंटल पिछले चार दिन के दौरान 116 किसानों से खरीदा गया है। एफसीआई केंद्र के प्रभारी एसएमआई लोकेश कुमार ने बताया कि उनके केंद्र पर 52 किसानों के जरिए 2500 क्विंटल की खरीद पूरी की जा चुकी है। बारदाना व बजट का कोई अभाव नहीं है।
सिर्फ किसानों से की जा रही खरीद
तिर्वा। सरकारी खरीद केंद्र के प्रभारियों का दावा है कि वह सिर्फ किसानों के ही जरिए खरीद कर रहे हैं। खरीद केंद्र पर किसानों का आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जोतबही अथवा खतौनी मांगी जा रही है। भुगतान आरटीजीएस सिस्टम के जरिए सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजा जा रहा है। एफसीआई केंद्र के प्रभारी ने बताया कि ढाई एकड़ जमीन वाले किसानों से अधिकतम 40 क्विंटल गेहूं लिया जाता है। सभी का दावा है कि बैकडोर से व्यापारियों के जरिए कोई खरीद नहीं हो रही है।
गल्ला आढ़तियों ने बैक डोर से खरीद का लगाया आरोप
मंडी समिति के कई गल्ला व्यापारियों ने आरोप लगाया कि मंडी के ही कुछ मध्यम श्रेणी के गल्ला व्यापारी चार दिन से साठगांठ करके अपनी आढ़त का गेहूं क्रय केंद्र प्रभारियों को तौल रहे हैं। इसके लिए जुगाड़ लगाकर क्षेत्र के किसानों के जोतबही व बैंक पासबुक मंगा लेते हैं। ऐसे व्यापारियों की खरीद केंद्र प्रभारी सुबह सात बजे से दस बजे तक व शाम के अंधेरे में करके कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं।