विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा से पांच माह का बकाया वेतन दिलाने के लिए ज्ञापन देते मेडिकल कालेज के जूनियर डाक्टर।
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प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेष सचिव शमीम अहमद खान ने बुधवार की दोपहर राजकीय मेडिकल कालेज का औचक निरीक्षण किया। बिना किसी कार्यक्रम के अचानक विशेष सचिव के आने से मेडिकल कालेज में अफरातफरी मच गई। वे सीधे मेडिकल कालेज की ओपीडी पहुंचे। यहां सूचना पाकर मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा.डीएस मारतोलिया व सीएमएस डा.दिलीप सिंह भी पहुंच गए। निरीक्षण में उनको कई स्थानों पर गंदगी मिली। वार्डों में बेड पर बिछी चादर फटी दिखाई दी। कई वार्डों में मरीज न के बराबर थे। मरीजों ने डाक्टरों पर बाहर से दवाएं मंगाने का आरोप लगाया है।
विशेष सचिव ने सबसे पहले रजिस्ट्रेशन कक्ष का निरीक्षण किया। यहां पर्चा बनवाने के लिए सैकड़ों मरीजो की लंबी-लंबी लाइनें लगी थी। इससे अफरातफरी मची थी। इस पर विशेष सचिव ने प्राचार्य से कहा कि रजिस्ट्रेशन काउंटर पर महिला मरीजों की सुविधा के लिए कुछ बेंच डलवा दी जाएं, ताकि उनको राहत मिल सके। मेडिसिन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। यहां मेडिसिन के सहायक प्रो.डा.मृदुल भूषण अपनी टीम के साथ मरीजों का उपचार कर रहे थे। अफसरों को देख लाइन में लगे कई मरीजों ने शिकायत की कि डाक्टर ने उनको बाहर की दवाइयां लिखी हैं।
इस पर विशेष सचिव ने डा. मृदुल भूषण से पूछताछ की। डाक्टर ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में ही मरीज की हालात को देखते हुए दवाओं को बाहर से मंगाने के लिए लिखा जाता है जो दवाएं मेडिकल कालेज में उपलब्ध नहीं हैं। इस पर विशेष सचिव ने उनको कहा कि बाहर से दवाई न मंगाई जाएं। इस दौरान मेडिसिन कक्ष में 221 मरीजों का पंजीकरण था। 181 मरीज देखे जा चुके थे। ईएनटी वार्ड में डा. अशरफ व उनकी टीम मरीजों का इलाज कर रही थी। यहां भी बहुत भीड़ व अफरातफरी का माहौल रहा। इस पर विशेष सचिव ने महिला व पुरुष मरीजों की लाइनें अलग-अलग लगवाने को कहा। कक्ष के अंदर जाकर डा.अशरफ से मरीजों के चल रहे उपचार के बारे में जानकारी ली।
जनरल के बारह वार्डों में भर्ती मिले 102 मरीज
तिर्वा (ब्यूरो)। विशेष सचिव का काफिला जनरल वार्ड में पहुंचा। यहां मेडिसिन मेल वार्ड में महज दो मरीज भर्ती मिले। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। इसी तरह मेडिसिन फीमेल वार्ड में सात मरीज भर्ती थे। मरीजों की तादाद कम होने पर उन्होंने स्टाफ नर्सों व चिकित्सकों से पूछताछ की। इसी तरह बाल रोग विभाग में 15, गाइनी विभाग में 22 समेत विभिन्न वार्डों में करीब 102 मरीज भर्ती थे। इस पर उन्होंने प्राचार्य से मरीजों की भर्ती की तादाद बढ़ाने को कहा।
रेडियोलाजी चिकित्सक न होने से नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
तिर्वा (ब्यूरो)। एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे के निरीक्षण के दौरान रेडियोलाजी विभाग के डाक्टरों की तैनाती न होने की बात सामने आई। मरीजों ने रोज अल्ट्रासाउंड न होने की शिकायत रखी तो प्राचार्य ने बताया कि महज एक ही रेडियोलाजी चिकित्सक है। जिस वजह से सप्ताह में दो दिन ही अल्ट्रासाउंड हो पा रहे हैं। एमआरआई व सीटी स्कैन की रिपोर्ट भी एक्सपर्ट डाक्टर की तैनाती न होने से मरीजों को नहीं मिल पाती है।
एनएसथीसिया डाक्टर न होने से नियमित नहीं चलती ओटी
तिर्वा (ब्यूरो)। ओटी के निरीक्षण के दौरान एनएसथीसिया डाक्टरों की कमी का मामला सामने आया। गाइनी, मेडिसिन, ईएनटी व सर्जरी के चिकित्सकों ने सचिव को बताया कि एनएसथीसिया चिकित्सकों की कमी के कारण नियमित आपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। आठ एनएसथीसिया चिकित्सकों के स्थान पर महज दो की ही तैनाती है। जिस वजह से विकल्प के रूप में ओटी चलाई जा रही है।
जूनियर डाक्टरों ने सचिव से पांच माह के बकाया वेतन मांगा
तिर्वा (ब्यूरो)। सीएमएस कार्यालय में मौजूद विशेष सचिव से मेडिकल कालेज में तैनात करीब 55 जूनियर व सीनियर रेजीडेंट चिकित्सकों ने ज्ञापन सौंपकर पांच माह का वेतन मांाग। हवाला दिया कि वह सभी मेडिकल कालेज में संविदा पर तैनात हैं। गत मार्च से उनको वेतन नहीं मिला है। इस वजह से उनके परिवार भुखमरी के कगार पर है। इस समस्या को देख उन्होंने तत्काल ही अपने विभागीय अफसरों से संपर्क साधा। डीजीएमई से भी पूछताछ की। पता चला कि वेतन संबंधी मामला डीजीएमई कार्यालय की फाइलों में लंबित पड़ा है। इस पर उन्होंने तत्काल डीजीएमई को निर्देश दिए कि वेतन संबंधी मामला शाम तक उनके कार्यालय में भेजा जाए। ताकि वह तीन दिन के भीतर मामले का निस्तारण कर बकाया वेतन दिलवा सकें।
विशेष सचिव ने माना मेडिकल कालेज में है डाक्टरों की कमी
तिर्वा (ब्यूरो)। मेडिकल कालेज के निरीक्षण के बाद विशेष सचिव ने पत्रकारों से भी वार्ता की। बताया कि प्रदेश सरकार ने 25 नए मेडिकल कालेज खोले जाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर चर्चा चल रही है। पूरे प्रदेश के मेडिकल कालेजों में फैकल्टी की कमी है। लोक सेवा आयोग के जरिए अभी तक भर्ती की जाती रही हैं। पिछले एक साल के दौरान आयोग से महज 146 डाक्टरों की भर्ती हुई है। कन्नौज मेडिकल कालेज में डाक्टरों की भारी कमी है। निरीक्षण में भी यह मामला सामने आया है। कन्नौज मेडिकल कालेज में तैनात 12 विशेषज्ञ डाक्टरों ने यहां से अन्य मेडिकल कालेज में तैनाती के लिए अपने आवेदन दे रखे हैं। नई सरकार बनने के बाद कन्नौज मेडिकल कालेज से अभी तक किसी भी डाक्टर को दूसरे मेडिकल कालेज के लिए नहीं भेजा गया है।