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एक्सप्रेस-वे पर नहीं दौड़ पाएंगे ओवरलोड वाहन

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कन्नौज/तालग्राम। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर दौड़ने वाले ओवरलोड वाहनों से होने वाले हादसों को रोकने और सड़कों को खराब होने से बचाने के लिए यूपीडा ने सख्ती की है। अब एक्सप्रेस-वे पर ओवरलोड वाहन नहीं दौड़ सकेंगे। यूपीडा ने हर टोल प्लाजा पर भार मापक यंत्र लगवाए हैं। यह वाहन की ओवरलोडिंग को पलक झपकते ही पकड़ लेंगे। मौके पर ही चालान होगा। टोल प्लाजा के पास धर्मकांटा भी बनवाया गया है।
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एक्सप्रेस-वे पर चलने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग पर अब उप्र औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने शिकंजा कसना शुरू किया है। ओवरलोड वाहन टोल पर पहुंचते ही पकड़ा जाएगा। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। इसमें वाहन का चालान या जुर्माना या फिर दोनों किए जा सकते हैं। संबंधित वाहन चालक को उसी समय भुगतान करना होगा। यदि कोई वाहन यहां से बचकर निकल भी जाता है तो उसके भार की जानकारी यहां लगे भार मापक यंत्र में फीड हो जाएगी। बाद में संबंधित अधिकारी उस वाहन नंबर के आधार पर उसके मालिक के पते पर चालान और जुर्माना का नोटिस भेजेंगे। अगर कोई चालक संतुष्ट नहीं होता है तो एक्सप्रेस-वे पर बनाए गए धर्मकांटे से वजन कराया जाएगा। यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी रमेश चंद्र दुबे ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के टोल प्लाजा पर माल वाहक वाहनों की लेन में भार मापक यंत्र लगाए गए हैं। जो वाहन इससे निकलेगा, उसका वजन सामने आ जाएगा। ओवरलोड होने पर कार्रवाई होगी।
रोज निकलते हैं करीब 500 ओवरलोड वाहन
तालग्राम। एक्सप्रेस-वे पर रोजाना हजारों वाहन निकलते हैं। इसमें छोटे-बड़े सवारी वाहनों के अलावा माल वाहक भारी वाहनों की संख्या भी काफी होती है। इनमें करीब 500 ऐसे भारी वाहन होते हैं जो क्षमता से अधिक भार लेकर एक्सप्रेस-वे पर दौड़ते हैं।
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सुरक्षा और सुविधाओं के पहले भी हो चुके इंतजाम
तालग्राम। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर इससे पहले भी यूपीडा सुरक्षा के कई इंतजाम कर चुका है। एक्सप्रेस-वे पर स्पीडोमीटर लगाए जा चुके हैं। इससे निर्धारित स्पीड से अधिक तेज वाहन चलाने पर चालान कट कर घर पहुंच जाता है। तीन से अधिक बार पकड़े जाने पर डीएल निरस्त किया जाएगा। प्रत्येक 50 किमी पर वाहन की स्पीड पर नजर रखी जा रही है। ओवर स्पीड पर गाड़ी को तुरंत रोक लिया जाता है। इंटरसेप्टर (गति मापक) कै मरे भी लगवाए जा चुके हैं। 30 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इमरजेंसी में कंट्रोल सेंटर से संपर्क करने के लिए प्रत्येक दो किलोमीटर पर इमरजेंसी कॉल बॉक्स लगाए गए हैं। रास्ते में कोई भी अनहोनी होने पर यात्री इसके जरिए कंट्रोल सेंटर को फोन कर तुरंत मदद मांग सकते हैं।
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