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एक माह में दो दौरे और दोनों बार गरमायी सियासत

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कन्नौज। इसे इत्तेफाक कहें या फिर रणनीति, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिछले दोनों दौरे चर्चा के कुछ मुद्दे छोड़ गए। 14 जनवरी को सौ शय्या अस्पताल में डॉक्टर से तकरार और उसके बाद सांसद पर पत्नी डिंपल के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगाकर अखिलेश सियासी हल्कों में नई बहस का मुद्दा छोड़ गए थे। शनिवार को सपा के महिला सम्मेलन में जय श्रीराम का नारा लगाने वाले युवक के जरिए खुद की सुरक्षा पर सवाल और बाद में भाजपा के एक नेता से खुद को धमकी मिलने की बात कहकर फिर चर्चाओं का बाजार गर्मा गए।
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नये साल में अखिलेश यादव का 14 जनवरी का दौरा खासा सुर्खियों में रहा था। मकसद था भीषण बस हादसे के घायलों का हाल जानने का, लेकिन घायलों के बीच मौजूदगी के वक्त सौ शय्या के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. डीएस मिश्रा के बोलने को मुद्दा बनाते हुए अखिलेश ने काफी खरी-खरी कही थी। नाम पता जानने पर डॉक्टर पर सरकार का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए डाक्टर की भूमिका को परोक्ष रूप से सियासत से जोड़ दिया था। इसे लेकर कई दिनों तक डॉक्टरों और सियासी हल्कों में काफी हलचल रही थी। सौ शय्या अस्पताल से निकलने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने बिना नाम लिए सांसद पर पत्नी डिंपल के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगाकर भी सभी को चौंका दिया था। इसकी प्रतिक्रिया में सांसद सुब्रत पाठक ने आरोप साबित होने पर राजनीति छोड़ देने तक का ऐलान कर दिया था। दोनों दलों में कई दिनों तक यह मुद्दा चर्चा में रहा था।
शनिवार को सपा के महिला सम्मेलन में युवक के जय श्रीराम का नारा लगाने पर बखेड़ा हो गया। सपा कार्यकर्ता उस युवक को धुनने में लग गए और अखिलेश यादव इसके सियासी निहतार्थ समझाने में। अखिलेश ने युवक की मौजूदगी को सुरक्षा में सेंध बताते हुए अपनी जान का खतरा बता दिया। इसके बाद भाजपा के एक नेता से धमकी मिलने की बात कही, लेकिन यह खुलासा नहीं किया कि क्या धमकी मिली है या किसने दी है। इसके बाद से दोनों दलों (सपा-भाजपा) के लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। आम लोगों की जुबां से लेकर सोशल मीडिया तक तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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इन दो दौरों के अलावा अखिलेश यादव का 23 और 27 जनवरी को कन्नौज आगमन हुआ, लेकिन कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ था। 23 को फर्रुखाबाद और 27 जनवरी को सैफई जाते समय कार्यकर्ताओं से रास्ते में रुककर मिले थे।
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