हसेरन। नहर विभाग की बेशकीमती जमीन पर गांव के 50 लोगों ने कब्जा कर आलीशान इमारतें व व्यवसायिक प्रतिष्ठान बना रखे हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन एक्सईएन के निर्देश पर विभाग ने अवैध कब्जों पर नोटिस चस्पा कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। डेढ़ साल बीतने को है पर नहर विभाग जमीन को कब्जेदारों से मुक्त नहीं करा पाया है।
कस्बे से निचली गंग नहर निकली है। नहर के आसपास विभाग की कई बीघा बेशकीमती जमीन है। नहर विभाग की अनदेखी के कारण इस जमीन पर कब्जा कर दुकान तो किसी ने रिहायशी मकान बनवा लिए है। इनमें कई राजनीति में अच्छी पहुंच रखने वाले लोग भी शामिल हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर अमर उजाला ने उनकी आवाज को उठाया। दो साल पहले प्रकाशित समाचार को संज्ञान लेते हुए नहर विभाग के तत्कालीन एक्सईएन पारसनाथ मौर्य के निर्देश पर करीब 40 अवैध कब्जाधारकों के घरों के बाहर पर नोटिस चस्पा करवाए गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
नोटिस जारी होने के बाद भी नहर विभाग जमीन को खाली नहीं करा पाया। एक्सईएन सूर्यमणि सिंह ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने कोर्ट से स्टे ले लिया, जिसके चलते अभियान को रोक दिया गया था। विभाग मजबूती के साथ कोर्ट में पैरवी कर रहा है। निर्णय आते ही नहर विभाग की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।