मूर्तियों की जांच करते पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी।
- फोटो : मूर्तियों की जांच करते पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी।
उमर्दा (कन्नौज)। मिरुअन मढ़हा गांव में जमीन से निकल रही देव प्रतिमाओं व मूर्तियों के भग्नावशेषों का लखनऊ से आई पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की टीम ने गुरुवार को अवलोकन किया। इसके बाद उनके नमूने लेकर कॉर्बन डेटिंग के लिए भेज दिया। टीम ने अंदाजन दो हजार साल पुरानी मूर्तियां होने का अनुमान लगाया है पर सही जानकारी कॉर्बन टेस्टिंग के बाद ही पता चल सकेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि ये मूर्तियां यहां किस कारण जमीन से निकल रहीं हैं।
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की एक टीम लखनऊ से मिरुअन मढ़हा गांव पहुंची और मूर्तियों की जांच पड़ताल की। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के समय जब टीले की मिट्टी पानी से धुलती है, तब यहां शिवलिंग व देवी की तरह दिखने वाली मूर्तियां अचानक प्रकट हो जातीं हैं। ग्रामीण कई साल से यह नजारा देख रहे हैं। उक्त जमीन को पौराणिक स्थल घोषित कर विकसित करने की मांग कर रहे हैं। पहले भी जिले के दौरे पर आए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से भी स्थानीय नागरिकों ने इन मूर्तियों की जांच करवाकर धार्मिक स्थल बनवाने की मांग की थी। इसी क्रम में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ से आई टीम ने टीले पर स्वत: प्रकट हुई मूर्तियों की जांच की।
टीम ने टीेले की मिट्टी सहित अन्य जरूरी नमूने जांच के लिए एकत्र किए हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि अवशेष दाे हजार वर्ष पुराने लग रहे हैं। इसके कारणों का भी पता लगाया जाएगा कि इस गांव में किस वजह से टीले से मूर्तियां निकल रहीं हैं। उन्हाेंने बताया कि डीएम को अवगत करा दिया है और इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जा रही है।