मानीमऊ(कन्नौज)। जिले में मरने वालों के सरकारी और जमीनी आंकड़े जुदा हैं। महादेवी घाट पर गंगा किनारे एक माह में करीब दो हजार शवों का अंतिम संस्कार हुआ है। इनमें ज्यादातर किसी न किसी बीमारी का शिकार हुए हैं। वहीं दूसरी ओर अस्पताल के आंकड़े पचास से भी कम पर अटके हैं।
श्मशान घाट पर दस अप्रैल से दस मई तक महादेवी गंगा घाट पर बड़ी तादाद में शवों को अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। एक माह में दो हजार शवों को जलाया गया है। इसमें ज्यादातर आधी उम्र पार कर चुके थे। कोरोना, कब्रिस्तान और एकांत में दफनाए गए लोगों का आंकड़ा रजिस्टर में दर्ज नहीं है। यह आंकड़ा केवल एक श्मशान घाट का है। इसमें भी 29 अप्रैल को मरने वालों की तादाद ज्यादा बताई गई।
दाह संस्कार समिति के राजनरायन पांडेय ने बताया कि 23 अप्रैल और चार मई के बीच मरने वालों की तादाद ज्यादा रही। 29 अप्रैल को श्मशान घाट पर 88 शव जलाए गए। यह अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। अब पांच मई से मृत्युदर में कुछ कमी आई है। अब कम शव दाह संस्कार के लिए आ रहे हैं।