तिर्वा। परिषदीय विद्यालयों में होने वाले खर्च का हिसाब-किताब अभी तक पाठशालाओं की दीवारों पर दर्ज नहीं किए गए। पाठशालाओं का हिसाब किताब दीवारों पर लिखकर सार्वजनिक करने के आदेश दिए गए थे। सत्र समाप्त होने के बाद भी दीवारों पर खर्च का हिसाब दर्ज नहीं हो सका है।
प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यलयों में निर्माण, फर्नीचर, बिजली, पंखे, हैंडपंप, स्वेटर, यूनीफार्म, खेलकूद, रंगाई और पोताई के लिए शासन से धनराशि का आवंटन होता है। धनराशि व खर्च का हिसाब किताब अभी तक शिक्षकों व अधिकारियों के बीच रहता था। बेसिक शिक्षा निदेशक ने अपने आदेश में कहा था कि विद्यालय जो काम कराएं वह सभी सार्वजनिक हों।
कामकाज का उल्लेख पाठशाला की दीवार पर लिखाकर सार्वजनिक करें। सत्र बदलने के बाद भी विद्यालयों की दीवारों पर खर्च का ब्योरा सार्वजनिक नहीं हो पाया। बीईओ अरविंद कुशवाहा ने बताया कि लॉकडाउन के कारण दीवारों पर अंकन नही हो पाया।