छिबरामऊ (कन्नौज)। बाल कटा कर शुक्रवार को साथियों के साथ साइकिल से लौट रहे छात्र डंपर की चपेट में आ गया। वह सड़क पर गिर पड़ा और पहिया उसे रौंदते हुए निकल गया। दोनों साथी चपेट में आने से बाल बाल बच गए। छात्र की मौत की जानकारी होने पर सैकड़ों ग्रामीणों के साथ पहुंचे परिजन ने अलीगढ़ कानपुर हाईवे की दोनों लेन पर जाम लगा दिया। एक घंटे बाद पुलिस ने समझा बुझाकर जाम तो खुलवा दिया, लेकिन कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजनों ने शव को नहीं उठने दिया।
मैनपुरी जिले के थाना छाछा अंतर्गत ग्राम गिरौरा निवासी नंदकिशोर राजपूत का पुत्र शिव सिंह (5) अपनी ननिहाल कोतवाली क्षेत्र के ग्राम गिरधरपुर में रहकर पढ़ाई कर रहा था। शिव सिंह छिबरामऊ के निजी विद्यालय में कक्षा एलकेजी का छात्र था। वह गांव के ही कृष (12) व लकी (11) के साथ छिबरामऊ बाल कटाने आया था। बाल कटाने के बाद शिव सिंह कृष की साइकिल पर बैठकर घर जा रहा था जबकि लकी अपनी साइकिल पर अकेला था।
पश्चिमी बाईपास पर कनक गेस्ट हाउस के पास सामने से आए डंपर ने कृष की साइकिल को चपेट में ले लिया और शिव सिंह व कृष सड़क पर गिर पड़े। डंपर का पहिया शिवसिंह के ऊपर से निकल गया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों छात्र बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद चालक डंपर को लेकर मौके से फरार हो गया।
एक घंटे तक लगे जाम में दोनों तरफ लगी वाहनों की लाइन
छात्र शिव सिंह की मौत के बाद परिजन ने हाईवे पर जाम लगा दिया। एक घंटे तक चले जाम में दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। भीड़ के आक्रोश को देखते हुए कोतवाल कपिल दुबे ने कोतवाली क्षेत्र के सभी चौकी इंचार्जों के अलावा सौरिख व विशुनगढ़ थाना पुलिस को भी बुला लिया। सीओ सुरेश मलिक व कोतवाल ने भीड़ लगाए लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। शाम 4.30 बजे नायब तहसीलदार रामप्रकाश के पहुंचने पर ग्रामीणों ने जाम खोला लेकिन शव को नहीं उठने दिया। कार्रवाई के आश्वासन के बाद 5.30 बजे परिजनों के सहमत होने पर पुलिस ने शव को सौ शैया अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया। कोतवाल कपिल दुबे ने बताया कि शनिवार को शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। छात्र को टक्कर मारने वाले डंपर को प्रेमपुर चौकी क्षेत्र में पकड़ लिया गया है।
दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं माता-पिता
परिजन ने बताया कि शिवसिंह के पिता नंदकिशोर व मां अजिता दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं। उसका बड़ा भाई पीयूष उन्हीं के साथ रहता है। छोटा होने के कारण शिवसिंह को देखभाल एवं पढ़ाई के लिए ननिहाल भेजा था। हादसे में शिव सिंह की मौत की सूचना पर सभी छिबरामऊ के लिए रवाना हो गए।