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पक्का घर मिलने के सपने पर ग्रहण

Wed, 11 Feb 2015 11:47 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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केंद्र सरकार की लेटलतीफी से गरीबों को आशियाना मिलने के सपने पर ग्रहण लग गया है। करोड़ों रुपये खर्च हो जाने के बावजूद जिले के 3109 लोगों को छत मुहैया नहीं हो पाई है। दूसरी किश्त न मिलने से लोगों के मकान अधूरे पड़े हैं। वहीं प्रदेश सरकार भी केंद्र के कंधे से कंधा मिलाते हुए अपने हिस्सा का बजट देने में विलंब कर रही है।
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विकास भवन के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 में कन्नौज के 8 ब्लाकों की  441 ग्राम पंचायतों में से इंदिरा आवास के लिए 3019 लाभार्थी चुने गए। पहली किश्त के रूप अनुसूचित जाति के 1883, सामान्य वर्ग के 640, अल्पसंख्यक वर्ग के 586 लाभार्थियों के बैंक खाते में प्रति लाभार्थी 35 हजार रुपये के हिसाब से धनराशि भेजी गई। ज्यादातर लाभार्थी पहली किश्त के बजट का उपयोग करके दीवारें खड़ी कर चुके हैं।

अब वह लेंटर डलवाने के लिए कभी ब्लाक तो कभी विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारी यह कहकर हाथ खड़े कर रहे हैं कि जितना बजट मिला था, उतना जारी कर दिया गया है। सितंबर महीने में भारत सरकार को दूसरी किश्त के लिए बजट आवंटन संबंधी मांगपत्र भेजा जा चुका है। करीब पांच महीने बीत जाने के बावजूद नतीजा जस का तस है।
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प्रदेश सरकार से भी उसके हिस्से का बजट मांगा गया है। इस योजना के तहत आवास निर्माण के लिए लाभार्थी को मिलने वाले 70 हजार रुपये की आर्थिक मदद में से 75 फीसदी धनराशि केंद्र सरकार देती है जबकि 25 फीसदी धनराशि प्रदेश सरकार देती है। कई महीने बीतने के बावजूद दूसरी किश्त न मिल पाने के कारण 31 मार्च तक आवासों के पूर्ण होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

इससे गरमी के मौसम में गरीबों को तेज धूप और फिर बरसात के मौसम में पानी की बौछारों की मार झेलनी पड़ेगी। कहने को तो अधूरे आवास बने खड़े हैं, लेकिन उससे कोई फायदा न होने से ग्रामीण परेशान हैं।
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ब्लाक       अधूरे आवास
छिबरामऊ       231
तालग्राम         382
सौरिख          154
हसेरन,           589
उमर्दा             504
कन्नौज           287
जलालाबाद       728
गुगरापुर           234    
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जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे
वित्तीय वर्ष के 10 महीने बीतने के बाद भी दूसरी किश्त का रुपया न आने के मुद्दे पर जनप्रतिनिधि खामोश हैं। जिले में सैकड़ों की तादात में नेताओं की फौज है लेकिन इस मुद्दे पर एक भी नेता बोलता या बजट आवंटन जल्द कराने के लिए प्रयासरत नजर नहीं आता है। कच्चे व जर्जर मकानों में रहने वाले गरीब परेशान है। उनका कहना है कि लेंटर न पड़ पाने के कारण बगैर छत की दीवारों का ढांचा उनके किसी काम की नहीं।
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अधूरे आवासों का निर्माण जल्द पूरा कराने का प्रयास करेंगे। जिला प्रशासन की तरफ से कोई देरी नहीं हो रही है। केंद्र सरकार से बजट जल्द आवंटन कराने के लिए दोबारा लिखापढ़ी कराएंगे।
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-रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी कन्नौज।
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