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दोपहर में पत्तियां मुरझाने लगें तो सिंचाई करें

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जलालाबाद (कन्नौज)। कृषि विज्ञान केंद्र अनौगी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीके कनौजिया ने खेत में खड़ी फसलों के प्रबंधन पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कभी धूप, कभी बदली और बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। इन दिनों खेत में मक्का, मूंग, उड़द, टमाटर, तरबूज आदि की फसलें खड़ी हैं। नियमित देखरेख से नुकसान की संभावना कम हो जाती है। मक्का की फसल में दोपहर में पत्तियां मुरझाने लगें तो सिंचाई कर दें।
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डॉ. कनौजिया का कहना है कि कोरोना महामारी से पूरा देश गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। किसान सामाजिक दूरी का पालन करते हुए इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए घरों में रहकर पशुओं और खेतों की देखरेख कर रहे हैं। जिले में करीब 25000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ग्रीष्म कालीन मक्का की फसल खड़ी है। इसमें जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई की जानी चाहिए। दोपहर के समय पत्तियां मुरझाने लगें तो समझ लेना चाहिए कि फसल को पानी की जरूरत है। इस समय दोपहर के पहले अथवा शाम के समय ही फसलों में सिंचाई करें। कीट और रोग के प्रति निरंतर निगरानी की जरूरत है। मक्का में किसी भी अवस्था में तना भेदक, पत्ती लपेटक या खाने वाले व फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप हो सकता है। इनसे बचाव के लिए जैविक व रासायनिक उपाय अपनाने चाहिए।
फसल बचाने के लिए ये उपाय करें
-तना भेदक कीट के लिए थायोमेंथाकजाम 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा इमामेक्टिंन बेंजोएट 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर को 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते हैं।
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-पत्ती लपेटक कीट के लिए साइपरक्लोरो 1.0 लीटर अथवा मेथाइल डेमेटोन 25 ईसी 500 मिली लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोलकर छिड़काव करें।
-फॉल आर्मीवर्म के लिए नीम का तेल 4 से 5 लीटर प्रति हेक्टेयर के साथ इमामेक्टिंन बेंजोएट 300 ग्राम अथवा स्पिनोसैड 300 मिली अथवा क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 300 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
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