तिर्वा-कन्नौज मार्ग के निकट निर्माणाधीन डीआईओएस कार्यालय का भवन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
तिर्वा क्रासिंग पर राजकीय पुस्तकालय में संचालित डीआईओएस दफ्तर को इस साल भी अपना भवन नहीं मिल सकेगा। डीआईओएस दफ्तर की जमीन हस्तानांतरित होने के बाद भवन निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम धीमी गति से काम कर रहा है।
डीआईओएस कार्यालय का निर्माण राजकीय निर्माण निगम करा रही है। कार्यदायी संस्था ने दो मंजिला इमारत का ढांचा तो खड़ा कर दिया है। कार्यालय में गेट, बिजली की वायरिंग, फर्श सहित अन्य तमाम काम बाकी हैं।
भवन निर्माण के लिए शासन से 69.98 लाख रुपये का बजट मंजूर हुआ था। कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि कई वर्षों तक तमाम अड़चनों के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। जिस कारण प्रोजेक्ट की कीमत लगातार बढ़ती गई। शासन से मिली धनराशि से निर्माण कार्य पूरा कराया जाना संभव नहीं है।
संस्था ने एक करोड़ 22 लाख रुपये का रिवाइज इस्टीमेट सौंपा है। तत्कालीन डीआईओएस केपी सिंह यादव ने कहा कि इस रिवाइज इस्टीमेट को जिला योजना में मंजूरी दिलाए जाने के लिए प्रस्ताव दिया गया। जिला पंचायत व जिला योजना की हुई बैठक में मुहर लगा दी गई है। परिषद से अब बजट मिलने का इंतजार है। फिलहाल शासन से बजट मिलने में काफी वक्त लग जाएगा। ऐसी स्थिति में राजकीय पुस्तकालय में डीआईओएस दफ्तर का कब्जा बरकरार रहेगा।
जिलाधिकारी जगदीश प्रसाद का कहना है कि जिला योजना में उन प्रस्तावों को विशेषकर रखा जाता है, जिनके काम अधूरे होते हैं। बजट जारी होते ही अधूरे कामों को समय सीमा में पूर्ण कराए जाने का प्रयास होगा। जिले के प्रभारी मंत्री संदीप सिंह के पास ही माध्यमिक शिक्षा विभाग है। प्रभारी मंत्री से डीआईओएस दफ्तर के लिए बजट आवंटित कराए जाने का अनुरोध किया गया है। उम्मीद है कि बजट को स्वीकृति मिल जाएगी।