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जीएसटी का फंडा, व्यापारी व दुकानदार उलझे

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अमर उजाला ब्यूरो
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कन्नौज। केंद्र सरकार का ऐतिहासिक कर निर्धारण का फैसला कन्नौज शहर के व्यापारियों से लेकर आम आदमी के बीच चर्चा का विषय बना रहा। जीएसटी पर व्यापारी व खरीदार अपना तर्क समझाते नजर आए। पुख्ता जानकारी किसी के पास नहीं मिली। किस सामान पर कितना टैक्स लगना है यह किसी के पास कोई लिखित सूचना नहीं है। बिल काटने का क्या प्रावधान है दुकानदार नहीं जानते हैं। जिसके चलते देर शाम तक लोगों ने बिना जीएसटी के अपना सामान बेचा।

कन्नौज शहर में कपड़े के दुकानदार गोविंद कनौजिया बताते हैं कि सुबह एक दो लोगों को टैक्स लगाकर गारमेंट्स के दाम बताए तो वह बिना सामान खरीदे ही चले गए। सुबह की बोहनी भी खराब हो गई। इसके बाद मजबूरी में उन्हें पुराने दाम में सामान बेचना पड़ा। शायद दो तीन दिन में ग्राहक भी जीएसटी की आदत डाल लेगा। वहीं, सरायमीरा कानपुर रोड पर सरिया व्यापारी पवन गुप्ता कहते हैं कि ग्राहक सस्ते में माल मांग रहा है। जब बिल देने की बात कहते हैं तो कहता है कि बिल का क्या करेंगे। बिना बिल के बताओ।
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तिर्वा रोड स्थित पेंट्स व्यापारी मोहम्मद हासिम रजा कहते हैं कि दुकान में रखे सामान में पुराने दाम पडे़ है। जीएसटी लगाकर मांगने पर अधिक पैसा कोई नहीं देगा। नये माल आने पर राहत मिलेगी। खाद बीज व्यापारी शेर सिंह कहते हैं अब नये माल को जीएसटी के हिसाब से बेचना होगा। कुछ माल है। जिसे उन्होंने महंगे दाम पर खरीदा था। अब बेचने में घाटा होगा।
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इधर जीएसटी को लेकर में तरह तरह से चर्चाएं दिनभर होती रही। कोई पेट्रोल व शराब में जीएसटी न लगने को लेकर माथापच्ची करता दिखाई दिया तो कोई हर राज्य में डीजल पर अलग-अलग टैक्स होने पर माल भाड़े को लेकर दुकानदारों के नुकसान का तर्क देता दिखाई दिया। फिलहाल सभी को कुछ ऐसा होने का इंतजार है कि सरकार की ओर जीएसटी को लेकर कार्यशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए। जिससे व्यापारियों व खरीददारों के मन की शंकाएं शांत हो सकें।

- थोक व फुटकर व्यापारी परेशान, पुराने रेट पर बेचा सामान
- सुबह से शाम तक पानी की गुमटी व नुक्कड़ों पर होती रही चर्चा
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