तिर्वा। सड़क हादसे में साथी की मौत से गुस्साए डॉक्टरों व एमबीबीएस छात्रों ने ओपीडी बंद कराकर बाहर धरने पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। प्राचार्य डॉ. सीपी पाल, सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह समेत कई विभागाध्यक्ष पहुंचे और समझाने का प्रयास किया। इसके बावजूद गुस्साए छात्रों ने डीएम और एसपी से मिलने की बात कही। इसके बाद डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे और मांगों को पूरा करने का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त कराया।
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर की हादसे में मौत से साथी और एमबीबीएस के छात्रों का गुस्सा दोपहर तक शांत नहीं हुआ था। डीएम शुभ्रांत शुक्ल, एसपी अमित कुमार आनंद, एसडीएम अशोक कुमार, सीओ डॉ. प्रियंका वाजपेयी ओपीडी बंद होने और धरना-प्रदर्शन की जानकारी पर कॉलेज पहुंचे। छात्रों ने डीएम से कॉलेज परिसर में कैंटीन, गेट के बाहर दोनों ओर बैरीकेडिंग, लाइब्रेरी को 24 घंटे खुलवाने, सीओ ऑफिस से कॉलेज तक लाइट की व्यवस्था और कॉलेज के गेट के सामने डिवाइडर के अवैध कट को बंद कराने की मांग की। डीएम ने छात्रों की सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्रों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया। प्राचार्य ने बताया कि जल्द ही कॉलेज परिसर में कैंटीन शुरू करा दी जाएगी और लाइब्रेरी को 24 घंटे खोला जाएगा।
एमबीबीएस छात्रों और डॉक्टरों का कहना था कि कॉलेज में कैंटीन होती तो डॉक्टर को चाय पीने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता और न ही उनकी हादसे में जान जाती। मेडिकल कॉलेज में इस कमी ने उनके एक साथी को छीन लिया।
छात्रों ने डीएम से हादसे में जान गंवाने वाले डॉ. कपिल देव त्रिपाठी के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा धनराशि दिलाए जाने की मांग की है। मुआवजा को लेकर डीएम शुभ्रांंत शुक्ला ने कहा कि कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कार व चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। एसपी अमित कुमार आनंद ने कहा कि प्रशासन डॉक्टर के परिजनों की हर संभव मदद का प्रयास करेगा।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब एक हजार मरीज इलाज कराने के लिए ओपीडी में आते हैं। गुरुवार सुबह भी मरीजों को कतार लग गई थी और करीब 254 मरीज डॉक्टरों से परामर्श लेकर दवा ले सके। इसके बाद डॉक्टरों और एमबीबीएस के छात्रों ने ओपीडी बंद करा दी और अन्य मरीजों को बिना दवा लिए ही बैरंग वापस लौटना पड़ा।
मार्ग पर जाम लगाकर बैठे एमबीबीएस छात्रों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस की लापरवाही की बात सुनते ही सीओ डॉ. प्रियंका बाजपेई नाराज हो गईं । उनकी एमबीबीएस छात्रों से तीखी नोकझोंक हो गई। प्राचार्य और सीएमएस ने मामले को शांत कराया।
छात्रों ने डीएम व एसपी से सीओ की शिकायत की। छात्रों ने कहा कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी जब ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग करेंगे तो अन्य पुलिस कर्मी कैसा व्यवहार करेंगे। इस बात को लेकर डीएम व एसपी ने नाराजगी जताई और मामला शांत कराया।