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जिला अस्पताल : तीन माह में 442 मरीज रेफर

Tue, 11 Aug 2015 11:49 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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जिले में मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी जिला अस्पताल से हर माह सैकड़ों मरीज बड़े शहरों के लिए रेफर कर दिए जाते हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो बीते तीन माह में 442 मरीजों को जिला अस्पताल से रेफर किया गया। कहने को यह वीवीआईपी जिला है, लेकिन अस्पतालों में सुविधाएं किसी कस्बे जैसी हैं। गंभीर मरीज देखते ही डाक्टर हाथ खड़े कर लेते हैं। मरीजों को रेफर स्लिप पकड़ाकर अपने कर्त्वयों से इतिश्री कर लेते हैं।
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जिला अस्पताल में 21 अप्रैल से 20 मई 2015 तक 1032 मरीज इमरजेंसी में भर्ती किए गए। इनमें से 162 मरीज रेफर किए गए। इसी तरह 21 मई से 20 जून तक 1139 मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इनमें से 172 मरीजों को कानपुर समेत अन्य शहर के लिए रेफर किया गया। 21 जून से 20 जुलाई तक 920 मरीज भर्ती किए गए। इनमें से 98 मरीजों को रेफर किया गया।

हड्डी रोग से संबंधित, ब्रेन में चोट आने पर, हृदय रोग से संबंधित व गोली लगने के मामले में पहुंचे ज्यादातर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर स्लिप पकड़ा दी जाती है। इसकी मुख्य वजह जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों व सर्जन की कमी बताई जा रही है। हार्ट के मरीजों के लिए तो यह अस्पताल पूरी तरह से रेफर केंद्र बन चुका है। यहां पर बीते करीब तीन साल से कार्डियोलाजी विभाग बंद पड़ा है।
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डा. सुनील कात्याल के तबादले के बाद आज तक किसी की तैनाती नहीं हुई। वहीं फिजियोथेरेपी विभाग का इससे से ज्यादा बुरा हाल है। यहां चार साल से कोई डाक्टर नहीं है। यहां संविदा पर फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की गई थी, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। इस वजह से लाखों रुपये कीमत की फिजियोथेरेपी से संबंधित मशीनें बेकार पड़ी हैं।

जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिदिन चिकित्सकों की बैठक ले रहे हैं। इसके अलावा पूरे दिन सभी वार्डों व ओपीडी कक्ष में पहुंचकर मरीजों से खुद हालचाल पूछ रहे हैं। कम से कम मरीजों को रेफर किया जाए, इस के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। डाक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बेवजह किसी मरीज को रेफर न करें। कुछ विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। यदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती हो जाए तो रेफर करने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
- डा. सीपी सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक जिला अस्पताल।

ट्रामा सेंटर के लिए न स्टाफ और न फर्नीचर
जिला अस्पताल में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर के भवन का निर्माण पूरा हुए करीब दो साल हो चुके हैं। लेकिन अब तक न तो फर्नीचर आया है और न ही डाक्टरों की तैनाती हुई है। इससे इमरजेंसी के गंभीर मरीजों को उपचार मिलने की सुविधा नहीं उपलब्ध हो पा रही है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में ही गंभीर मरीजों का प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बाहर भेजना पड़ता है।
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जिला अस्पताल में चिकित्सीय स्टाफ पर एक नजर
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