छिबरामऊ। कांशीराम कॉलोनी में बंधक बनाए गए बेटे के मुक्त होने के बाद अर्चना पहुंच गई। उन्होंने बताया कि दीपू की बुआ कॉलोनी में ही रहती है, जहां पर दीपू का आना-जाना था। कॉलोनी में ही उसकी छोटी सी गुमटी थी। वहां पर दीपू आता रहता था। चार माह पहले दीपू और उसका बहनोई जबरन गाड़ी में बैठाकर कन्नौज ले गए थे और तमंचे के बल पर दीपू ने जबरन कोर्ट मैरिज की थी। इसके बाद वह अपने साथ दिल्ली लेकर चला गया था।
कांशीराम कॉलोनी की रहने वाली अर्चना ने बताया कि पति के निधन के बाद वह अपने बच्चों के साथ रहना चाहती थी। बच्चों के पालन पोषण के लिए कॉलोनी में ही छोटी सी गुमटी रखी ली थी, लेकिन दीपू उसको तमंचे के बल पर अपने साथ ले गया और कन्नौज में एक कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे। पढ़ी-लिखी न होने के कारण उसे पता नहीं चला कि कोर्ट मैरिज के कागज हैं। इसके बाद दीपू अपने साथ दिल्ली ले गया, जहां पर आए दिन मारपीट करता था। गुरुवार रात वह दिल्ली से अपनी बहन के घर चली आई। दीपू भी उसे खोजता हुआ कॉलोनी पहुंच गया और बच्चों को बंधक बना लिया। पुलिस ने बेटे को बंधक मुक्त कराया। पुलिस की कार्रवाई से वह खुश है।
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पुलिस जिंदाबाद के लगे नारे
कॉलोनी के रहने वाले लोगों ने पुलिस की कार्रवाई से काफी खुश नजर आए। लोगों ने पुलिस जिंदाबाद के नारे लगाए। साथ ही एसपी और पूरी पुलिस टीम का ताली बजाकर आभार जताया।