तिर्वा। सीएचसी में प्रसव के नाम पर रुपये वसूलने के आरोपों की जांच करने मंगलवार को डिप्टी सीएमओ पहुंचे। स्टाफ नर्सों पर प्रसूता के तीमारदारों से 2300 रुपये लेने का आरोप लगा था। इस मामले ने सुर्खियों में आने के बाद सीएमओ स्वदेश गुप्ता ने जांच के निर्देश दिए थे।
डिप्टी सीएमओ महेंद्र भान ने सीएचसी पहुंचकर स्टाफ नर्सों से जानकारी ली। स्टाफ नर्सों ने आरोपों को प्राइवेट अस्पताल संचालकों की ओर मोड़ दिया। उन्होंने बताया कि संचालक गर्भवतियों को निजी अस्पताल में ले जाना चाहते थे। स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोका। इसके बाद अस्पताल संचालकों ने रुपये मांगने का आरोप लगवा दिया। नर्सों ने बताया कि गर्भवतियों के सीएचसी पहुंचते ही आसपास के कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक आ गए थे। उन्होंने बेहतर सुविधाओं का हवाला देकर मरीजों को प्रभावित करने की कोशिश की।
हालांकि, ड्यूटी पर तैनात नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए सभी गर्भवतियों को भर्ती किया। उन्होंने आवश्यक जांच के बाद सुरक्षित रूप से सामान्य प्रसव कराए। यह सक्रियता प्रसूताओं को निजी अस्पतालों के जाल में फंसने से बचाने में सहायक रही। स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रियता से प्रसूताएं निजी अस्पतालों के जाल में फंसने से बच गईं। सीएचसी प्रभारी राजन शर्मा ने बताया कि स्टाफ नर्सों से पूछताछ के दौरान संचालक अस्पताल में मरीज भर्ती कराने का दबाव बना रहे थे। विरोध करने पर उन्होंने पैसे लेने का आरोप लगाया।
आशा कार्यकर्ताओं की सहभागिता की जांच
इस घटना क्रम में आशा कार्यकर्ताओं और कुछ प्राइवेट अस्पतालों के बीच तालमेल के आरोप लग रहे हैं। सीएचसी प्रभारी राजन शर्मा ने बताया कि घटना में आशा कार्यकर्ताओं की सहभागिता है। इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर में कोई प्राइवेट अस्पताल संचालक दिखाई देता है तो कार्रवाई की जाएगी।