फोटो :17: खड़िनी क्षेत्र में निचली गंग नहर के किनारे पटरी पर बना खंदक। संवाद
फोटो :18: कंसुआ नहर पुल के पास सड़क पर 90 डिग्री का मोड़। संवाद
- सिंचाई विभाग व पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से आए दिन हो रहे हादसे, फिर भी विभाग उदासीन
-पटरियों के किनारे नहीं बनाई गई रिटेनिंग वॉल, हर साल मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये होते खर्च
हादसा : एक
अप्रैल 2018 : 21 अप्रैल 2018 को इंदरगढ़ क्षेत्र में एक बोलेरो कार हैंडब्रेक पर खड़ी होने के बावजूद ढलान के कारण गंगा नहर में गिर गई थी। इस घटना में दूल्हे और उसके बाबा की डूबने से मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब बारात के स्वागत का इंतजार किया जा रहा था।
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हादसा : दो
फरवरी 2020 : 5 फरवरी 2020 को उमर्दा ब्लॉक के चटरुआपुर गांव के पास एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर निचली गंगा नहर में गिर गई थी। इस हादसे में एक ही परिवार की दो महिलाओं और तीन बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि तीन लोग घायल हुए थे। ये लोग ठठिया कस्बे से छिबरामऊ एक रस्म में शामिल होने जा रहे थे।
हादसा : तीन
मई 2024 : 25 मई 2024 को छिबरामऊ क्षेत्र के ग्राम दीपकपुर निवासी राहुल शाक्य अपने एक साथी के साथ क्षेत्र के ग्राम राजपुर निवासी अभिषेक की बहन की बरात में शामिल होने नहर की पटरी से सफेद कलर की स्कॉर्पियो से आए थे। दोनों युवक मय वाहन नहर के बीचोबीच में जा गिरे थे, जिसमें दोनों की मौत हो गई थी।
संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। जिले में सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही का खामियाजा आमजन को जान देकर भुगतना पड़ रहा है। जिले की प्रमुख नहरों, जैसे निचली गंगा नहर और विभिन्न बंबों की पटरियों पर बनी सड़कें अब सड़क कम और मौत का खंदक ज्यादा नजर आती हैं। इसके साथ ही पुलों के पास 90 डिग्री के मोड़ हैं, जहां कोई संकेतक भी नहीं लगा है। ऐसे में आए दिन हादसे हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों को भनक नहीं है।
कभी सिंचाई विभाग की यह पटरियां केवल विभागीय निरीक्षण के लिए होती थीं जिन पर आम वाहनों का प्रवेश वर्जित था और उल्लंघन पर कैनाल एक्ट के तहत तावान (जुर्माना) वसूला जाता था। समय बदला और ग्रामीणों की सुविधा के लिए इन पटरियों पर पक्की सड़कें बना दी गईं। आज स्थिति यह है कि इन सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव तो बढ़ गया है लेकिन इनके रखरखाव की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
नहरों के किनारे होने के कारण पानी के रिसाव और बारिश से पटरियों का किनारा तेजी से कट रहा है। कई जगहों पर सड़क के बिल्कुल बगल में गहरे गड्ढे और खंदक बन गए हैं। जिले में उमर्दा, तिर्वा, खड़िनी और इंदरगढ़ क्षेत्रों में ऐसे कई ब्लैक स्पॉट हैं जहां सड़कें इतनी संकरी हो गई हैं कि दो वाहनों का पास होना नामुमकिन है। तिर्वा-इंदरगढ़ मार्ग और उमर्दा की नहर पटरियों पर संकेतांक और डिवाइडर न होने से रात के समय हादसे और भी बढ़ जाते हैं। कंसुआ पुल के पास तो आए दिन हादसे हो रहे हैं, फिर भी प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है, जबकि पुल के पास 90 डिग्री का मोड़ रोजाना हादसों का सबब बन रहा है।
इनसेट-
पटरियों पर बनीं सड़कों में मानकों की अनदेखी
खड़िनी। हसेरन व खड़िनी क्षेत्र में नहर और रजबहों की पटरियों पर जो सड़कें बनवाईं गईं हैं, उनमें मानकों की भरपूर अनदेखी की गई है। इन सड़कों पर आवागमन खतरे से खाली नहीं है। जरा सी चूक मौत का कारण बन सकती है। स्थिति यह है कि यदि कोई इलाके की भौगोलिक स्थिति से अनजान है तो रात में पटरी पर सफर बिल्कुल न करें। ग्राम सभा कंसुआ के प्रधान सर्वेश शाक्य ने बताया कि कंसुआ पुल से सकतपुर संपर्क के लिए बनाए गये मार्ग के समीप 90 डिग्री पर मोड़ बना दिया गया है। खास बात यह कि इस खतरनाक मोड़ पर न ही कोई स्पीड ब्रेकर बनाए गए और न ही संकेतक व चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इलाके के रिंकू तिवारी, पंजाबी ठाकुर, खिलौना सिंह, पप्पू तिवारी, आलोक प्रताप, अरविंद सिंह ,लाल सिंह ने सड़कों को दुरुस्त करने के साथ सभी मोड़ पर स्पीड ब्रेकर, बनवाए जाने की मांग की है।
बोले जिम्मेदार
नहर की पटरी पर बनी सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है। सिंचाई विभाग केवल खंदी सही कराता है। सफाई के दौरान खंदक भरवाए जाते हैं। -सूर्यमणि सिंह, अधिशासी अभियंता, नहर विभाग
नहर की तरफ जो भी कटान या खंदक हैं उसे सही कराने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। कंसुला पुल के पास जो भी 90 डिग्री के मोड़ हैं, वहां स्पीड ब्रेकर बनवाए जाएंगे और संकेतक व चेतावनी बोर्ड भी लगवाए जाएंगे।-नसीम अहमद, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी