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Kannauj News: दवा से हुआ खेती में नुकसान, नहीं मिला मुआवजा

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कन्नौज। बीज शोधन की दवा के चलते 250 किसानों का 1900 बीघा क्षेत्रफल में आलू नहीं उगा। अधिकारियों की जांच में दवा को दोषी पाया गया। कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की गई। बिक्री व उत्पादन पर रोक लगी, लेकिन अभी तक किसानों को नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है।
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यूपी के कृषि निदेशक विवेक सिंह ने कन्नौज में हुए आलू बीज के नुकसान की जांच के लिए संयुक्त कृषि निदेशक कानपुर मंडल महेंद्र सिंह, चंद्रशेखर आजाद विश्वविद्यालय कानपुर से वैज्ञानिक डॉ. विश्वास, डीडी कृषि जीसी कटियार, जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह और डीएचओ सीपी अवस्थी की टीम गठित की थी। नवंबर में अधिकारियों की टीम ने जांच के बाद जो रिपोर्ट निदेशालय भेजी है, उसमें कृषि दवा को गलत ठहराते हुए कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। उसके बाद दवा के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हालांकि लैब में दवा का सैंपल सही पाया गया, लेकिन अब तक बिक्री व उत्पादन पर प्रतिबंध लगा है। इस कार्रवाई के बीच किसानों को कोई राहत नहीं मिली है। न तो मुआवजा दिया गया है और न ही कोई ठोस आश्वासन मिला है।
जुराखनपुर्वा निवासी अजीत कुमार ने उनको अब तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है, जबकि करीब 30 बीघा खेतों में आलू नहीं उगा था। इस्वापुर निवासी रामू ने बताया कि दवा की वजह से उनका भी करीब 70 बीघा खेतों में आलू फसल नहीं उगी। अधिकारियों ने अब तक कोई राहत नहीं दी है। किसान सुरेश ने बताया कि सरकार को नुकसान की भरपाई का रास्ता निकालना चाहिए।
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किसानों को राहत देने के लिए शासन स्तर या उच्चाधिकारियों की ओर से ही निर्णय लिया जाना है। अब तक इस बारे में कोई पत्र नहीं आया है। जांच के बाद धनस्टिन दवा कंपनी की बिक्री पर प्रतिबंध लग गया था, जो जारी है।
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अविशांक सिंह चौहान, प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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