फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संत और शास्त्र सिखाते, लोगों को जीने की कला

विज्ञापन
विज्ञापन
तालग्राम। श्यामा श्याम मंदिर के अमोलर में सोमवार को संत सम्मेलन के बाद संत महात्माओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। संत शिरोमणि श्री श्री 108 सीताराम जी महाराज ने कहा कि समाज के लोगों को संत जीवन जीने की कला सीखाते हैं। जो लोग संतों के बताए रास्ते पर चलते हैं उनके जीवन में कभी भी दु:ख नहीं आता है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि हर एक घर में सनातन संस्कृति के प्रतीक गो माता, तुलसी जी, गंगा जल और श्रीमद्भागवत गीता अवश्य रूप से होने चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र से शिक्षा लेनी चाहिए। समाज के प्रत्येक घर में श्री रामचरित मानस का नित्य पाठ होना चाहिए। जब समाज के लोग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चरित्र का अनुकरण करेंगे, तभी हमारे समाज में राम राज्य की स्थापना होगी।
संत आज्ञा के अनुसार जो लोग जीवन जीते हैं, वे सुख, समृद्धि, यश, और उन्नति प्राप्त करते हैं।
संत कोतवाल दर्शन दास महाराज ने कहा कि संतों ने सनातन काल से ही भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज की उन्नति के लिए कार्य किया है। आज कुछ बनावटी संत शास्त्रों की आज्ञा के विपरीत कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों से समाज को सचेत रहना है। इस दौरान भंडारा हुआ। भक्तों ने प्रसाद चखा।इस मौके पर नंदरामदास, वीरभानदास, ग्यारामदास, रामस्वरुप दास, बेचेलालदास, छबीलेदास, दशरथदास, हरि सिंह दास, छविनाथ दास, मनोजदास, रामलूला, हाकिम दास मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें