जिले की कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिले के दूर-दराज गांवों में आठ नई पुलिस चौकियां खोली जाएंगी। वहीं औसेर व गोसाईंदासपुर में दो नए थाने स्थापित करने की भी योजना अंतिम दौर में पहुंच चुकी है।
नजदीक में ही चौकी स्थापित हो जाने से अराजकतत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी रहेगी। एसपी ने सभी चौकी और थानों में इसी साल कामकाज शुरू कराने के लिए कवायद तेज कर दी है।
जिले में काफी इलाका गंगा व काली नदी के बीच में बसा है। यहां पर आने-जाने के साधन बेहद कम हैं। इसलिए इन कटरी इलाकों के गांवों में अपराध अधिक होते हैं। इन इलाकों में अपनी पहुंच मजबूत बनाने के लिए पुलिस महकमे ने गोसाईंदासपुर विकास खंड गुगरापुर में नया थाना खोलने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।
इसी तरह कानपुर नगर और कानपुर देहात व औरैया जिले के सीमा वर्ती क्षेत्र में बसे ठठिया क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की स्थिति बेहद भयावह है। इसलिए औसेर में नया थाना खोलने की रणनीति पुलिस अफसरों ने तैयार की है। अक्सर यहां पर अपराधी क्राइम करने के बाद सीमावर्ती दूसरे जिले के गांवों में शरण ले लेते हैं। ठठिया और तिर्वा थाना बेहद दूर होने के कारण पुलिस समय पर त्वरित शिकंजा कसने में नाकाम हो जाती है।
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इन क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं चौकियां
गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव सराय प्रयाग, सौरिख थाने के गांव पालन अड्डा, तालग्राम थाने के गांव बेहटा खास, अमोलर, विशुनगढ़ थाने के गांव कैरदा, छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव केरदा रोड मोड, निजामपुर गढ़िया, जहानगंज रोड। इनमें से निजामपुर गढ़िया शासन स्तर से प्रस्तावित है, जबकि शेष अन्य पुलिस चौकियां पुलिस कप्तान की तरफ से खोली जाएंगी।
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अपराधियों को दंड, जनता को राहत
अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य ने बताया कि नई पुलिस चौकियां खुल जाने से आपराधिक तत्वों को दंडित कराने में मदद मिलेगी। इससे गांव के लोगों को राहत महसूस होगी। प्रयास है कि इसी साल ये सारी चौकियां विधिवत संचालित हो जाएं। दारोगा से लेकर यहां आधा दर्जन सिपाही तक तैनात कराए जाएंगे। ये दारोगा व सिपाही चौकी में ही 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे। क्षेत्र भ्रमण व गश्त बढ़ेगा। छोटी घटनाओं को फौरन रोका जा सकेगा।
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समय व धन की होगी बचत
जनता के लिहाज से देखें तो पुलिस चौकियां उनका समय और रुपया दोनो बचाएंगी। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अक्सर थाने तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जहां तक पहुंचने में किराया भाड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ता है। चौकी पास में होने पर वे पैदल या साइकिल से भी आसानी से पहुंच सकेंगे। ऐसे में किराए के वाहनों पर निर्भरता कम हो जाएगी।