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हाईटेंशन तार की चपेट में आकर किसान की मौत

Fri, 15 Sep 2017 12:28 AM IST
kannauj
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मृतक महेशचंद्र (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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सौरिख। क्षेत्र के ग्राम हुसेपुर तुर्कन में खेत मे पानी लगा रहे किसान के सिर में हाईटेंशन लाइन का तार छू गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गुस्साए किसानों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शव रखकर मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। लगभग तीन घंटे तक चले जाम से लोग बेहाल हो गए। बाद में अपर जिलाधिकारी और अधिशासी अभियंता नेमृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दी और कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर लोगों ने जाम खोला।
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क्षेत्र के ग्राम हुसेपुर तुर्कन निवासी महेशचंद्र पाल (45) पुत्र कंचनलाल बुधवार शाम को अपने धान के खेत में पानी लगाने गए थे। उनके साथ गांव के ही राजीव पुत्र महिपत सिंह भी थे। राजीव ने बताया कि खेत में बिजली के तार काफी नीचे थे। अचानक एक तार महेश के सिर में छू गया, जिससे वह वहीं गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। गुरुवार सुबह करीब साढ़े सात बजे परिजनों ने 33 केवी विद्युत उपकेंद्र के सामने छिबरामऊ-बिधूना मुख्य मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया।

ग्रामीणों ने सड़क पर ट्रैक्टर आड़े-तिरछे खड़े कर दिए और बबूल की झाडिय़ां काटकर डाल दी। जाम के चलते दोनों वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीणों का आक्रोश देखकर विद्युत विभाग के कर्मचारी उपकेंद्र में ताला डालकर मौके से भाग निकले। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना पाकर सीओ श्रीकांत प्रजापति, थानाध्यक्ष आरपी पांडेय मौके पर पहुंचे।
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उन्होंने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लोगों के आक्रोश को देखते हुए आस-पास के सभी थानों की फोर्स को मौके पर बुला लिया गया। छिबरामऊ कोतवाल संतोष कुमार व्यास, विशुनगढ़ थानाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, इंदरगढ़ थानाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह, तालग्राम थानाध्यक्ष सुरेश कुमार सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी डीपी सिंह, तहसीलदार अबुल कलाम, अधिशासी अभियंता शंकरलाल अग्निहोत्री, एसडीओ कमलेश कुमार मौके पर पहुंचे। एडीएम ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह जर्जर तार हटवाने, मृतक के आश्रितों को दस लाख मुआवजा तथा पुत्र को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग पर अड़े थे।

अधिशासी अभियंता ने मृतक की पत्नी सुनीता देवी को एक लाख रुपए आर्थिक सहायता की चेक प्रदान की। एडीएम ने सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया, तब जाकर लोगों ने साढ़े दस बजे के करीब जाम खोला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।  

पहले हुई मौतों पर भी नहीं जागा विभाग
सौरिख। हुसेपुर तुर्कन गांव में जहां महेशचंद्र पाल की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हुई है। उससे पहले भी 26 अप्रैल को इसी गांव के प्रशांत पुत्र भगवतदयाल की मौत तार की चपेट में आने से हो गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक इसके बाद लगभग 8 नील गाय और 1 गाय की भी मौत झूलते तारों की वजह से हो चुकी है। कई बार शिकायत करने के बाद भी विद्युत विभाग के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने एसडीओ व जेई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना था कि पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। फिर भी विभाग ने जर्जर तारों को नहीं बदलवाया, जिससे आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।  

एडीएम के घटनास्थल पर न जाने से रोष
सौरिख। हुसेपुर तुर्कन गांव में सीओ श्रीकांत प्रजापति ने घटनास्थल पर पहुंचकर झूलते तारों का निरीक्षण किया। साथ ही वह जगह देखी, जहां महेशचंद्र पाल का शव पड़ा था। उस जगह धान की फसल जल गई थी। अपर जिलाधिकारी डीपी सिंह मौके पर तो गए, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों के कहने के बाद भी घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त था। लोगों का कहना था कि जिले के प्रशासनिक अधिकारी जनसमस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं। यही वजह है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी समस्या हल नहीं होती है।  

उच्चाधिकारियों ने नामंजूर किया इस्टीमेट : एसडीओ
सौरिख। उपखंड अधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि क्षेत्र में जर्जर तारों को बदलने के लिए उन्होंने 40 किलोमीटर लंबी लाइन का इस्टीमेट बनाकर पिछले साल ही उच्चाधिकारियों के पास भेज दिया था। विभागीय अधिकारियों ने इस इस्टीमेट को नामंजूर कर दिया, जिससे मजबूरी में जर्जर तारों में आपूर्ति देनी पड़ रही है। वहीं अधिशासी अभियंता शंकरलाल अग्निहोत्री ने बताया कि वह इस समस्या को लेकर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि.आगरा के प्रबंध निदेशक एसके वर्मा और प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार से भी वार्ता करेंगे। सौरिख क्षेत्र में सभी जर्जर लाइनों को बदलवाया जाएगा।  

सात बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
सौरिख। ग्राम हुसेपुर तुर्कन निवासी महेशचंद्र पाल के परिवार में पत्नी सुनीता देवी के अलावा छह पुत्रियां और एक पुत्र है। इनमें दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है, जबकि तीन पुत्रियां बबिता (14), प्रियांशी (12), डिंपल (7), नन्हीं (6) और दस वर्षीय इकलौता पुत्र दीपेश पढ़ाई कर रहे हैं। मृतक के नाम केवल 2 बीघा जमीन है और वह अपनी खेती के अलावा मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था। इस हादसे से चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
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