कन्नौज। शहर की एक युवती की ओर से सदर पालिकाध्यक्ष शैलेेंद्र अग्निहोत्री और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमे की पुलिस ने जांच पूरी कर ली है। जांच में पुलिस ने पालिकाध्यक्ष और पीड़िता के बीच पति-पत्नी का रिश्ता माना है। जांच में सामने आया है कि पालिकाध्यक्ष और उनके परिवार के लोगों ने दहेज के लालच में उसे प्रताड़ित किया। मुकदमे में पुलिस ने परिवार के कुछ लोगों को राहत भी दी है। पुलिस जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
22 नवंबर 2018 को शहर में रहने वाली एक युवती ने पालिकाध्यक्ष शैलेंद्र अग्निहोत्री के खिलाफ शादी का झांसा देकर बंधक बनाकर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। शैलेंद्र के दोस्त मोहन, आशू अवस्थी, आलोक दुबे पर दुष्कर्म में सहयोग का आरोप था। मुकदमे में पीड़िता ने बताया था कि शैलेंद्र अग्निहोत्री ने उसके साथ शादी भी की है। शादी के बाद उसे पत्नी का दर्जा नहीं दिया। दहेज में 20 लाख रुपये न देने पर मां मीना अग्निहोत्री, चाची मोनी, चाचा संजय और अतुल अग्निहोत्री, भाई विक्रांत अग्निहोत्री ने उसका उत्पीड़न किया। इसके बाद घर से निकाल दिया। सदर कोतवाली में मामला दर्ज होने के बाद मामले की जांच क्राइम ब्रांच प्रभारी विकास राय को दी गई थी। 29 नवंबर 2018 से उन्होंने मामले की जांच शुरू की थी। गुरुवार को उन्होंने मामले की जांच पूरी कर एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह को सौंप दी। जांच में शैलेंद्र अग्निहोत्री और पीड़िता के बीच पति पत्नी के रिश्ते को बताया गया है।
24 जून 2018 को पालिकाध्यक्ष शैलेंद्र अग्निहोत्री ने पीड़िता से शादी की थी। इसके बाद 31 जुलाई 2018 को दोनों ने सदर तहसील में रजिस्ट्रार के यहां शादी का पंजीकरण कराया था। शादी के करीब एक माह 14 दिन दोनों लोग बतौर पति-पत्नी लखनऊ के आलमबाग स्थित एक होटल में भी रुके थे। जांच में दहेज की मांग करने की बात सही साबित हुई है। वहीं, विवेचक ने पूरे मामले में परिवार के कुछ लोगों को निर्दोष पाया है। इनके नाम भी मुकदमे से अलग कर दिए हैं। क्राइम ब्रांच प्रभारी विकास राय ने बताया कि जल्द चार्जशीट कोर्ट में प्रेषित की जाएगी।
सदर पालिकाध्यक्ष ने की थी दहेज की मांग
75 दिन में क्राइम ब्रांच प्रभारी ने पूरी की जांच, पालिकाध्यक्ष ने युवती से की थी शादी, दहेज की मांग को लेकर ससुराल से निकालने का पीड़िता का आरोप जांच में साबित हुआ सच