जिला न्यायालय के एडीजे चतुर्थ न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने मंगलवार को 26 साल पुराने सरकारी मिट्टी के लूट में दोषी पाए गए चारों आरोपियों को चार-चार वर्ष की सजा सुनाई, साथ ही दो-दो हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया। जुर्माना न भरने पर चारों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। सजा के बाद चारों को जेल भेज दिया गया।
शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि 20 जुलाई 1991 में वादी विक्रमाजीत कटियार के अनुसार वह नहर विभाग में सींचपाल के पद पर कार्यरत था। 20 जुलाई की शाम करीब छह बजे जब वह सौरिख थाना क्षेत्र के रजबहा मिर्जापुर की देखरेख करते हुए जलालपुर की आपासी(सिंचाई) लिख रहा था। उसी समय रजबहा मिर्जापुर मीटर 12, फलांग 4,5 के मध्य पहुंचा तो वहां नहर की पटरी पर थाना सौरिख क्षेत्र के जलालपुर निवासी महेश, राजकुमार पुत्रगण राजेश्वर, रामकुमार पुत्र छोटेलाल व रामेश्वर पुत्र पम्मू नहर की दांई पटरी काटकर भैंसागाड़ी पर नहर की मिट्टी खोदकर भर रहे थे। उसने जब चारों से मिट्टी भरने से मना किया तो चारो उसे लात-घूसों से मारने-पीटने लगे और उसके हाथ से सरकारी खसरा छीनकर जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। मामले में उसने 21जुलाई 1991 थाना सौरिख में चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि मामले की विवेचना तत्कालीन एसआई एसपी सिंह को सौंपी गई। विवेचक ने विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। साक्ष्याें और अधिकवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद कोर्ट ने चारो आरोपियों को लूट का दोषी पाया। चारो को कोर्ट ने चार-चार वर्ष का कारावास सुनाया।