अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। लखनऊ में एप्पल के मैनेजर की सिपाहियों द्वारा हत्या ने ढाई साल पहले दलित परिवार हुए पुलिसिया कहर की याद ताजा कर दी है। आधी रात में घर में घुसकर कोतवाल ने सिपाहियों संग पूरे परिवार को बेरहमी से पीटा था। एससी/एसटी आयोग के हस्तक्षेप पर रिपोर्ट तो दर्ज हो गई लेकिन करीब दो साल हो रही हैं अभी तक पुलिस मामला जांच में लटकाए है।
संदोहनपुरवा गांव निवासी शशि दोहरे का 10 अप्रैल 2016 को पड़ोसी से विवाद हो गया था। समझौता के लिए तत्कालीन कोतवाल भुल्लन यादव शशि पर दबाव बना रहे थे। शशि नहीं मानी तो 14 अप्रैल को रात 12 बजे कोतवाल भुल्लन यादव फोर्स के साथ शशि के घर में घुस गए। आरोप है कि कोतवाल ने शशि, उसकी मां फूलमती देवी व भाभी मालती को बेरहमी से पीट दिया था। इसमें मालती देवी को गंभीर चोटें आई थी। भुल्लन यादव और सिपाहियों पर कार्रवाई के लिए शशि जनप्रतिनिधियों, आईजी और डीआईजी तक से मिलीं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इस पर 16 अक्तूबर को शशि ने एससी/एसटी आयोग में गुहार लगाई। आयोग के निर्देश पर सदर कोतवाली में कोतवाल भुल्लन यादव के खिलाफ मारपीट और एससी/एसटी का मुकदमा दर्ज हुआ था।
23 महीने बीत रहे हैं लेकिन अभी तक जांच के नाम पर पुलिस मामला दबाए है। शशि का कहना है कि अगर जल्द आरोपी कोतवाल और सिपाहियोें के खिलाफ कार्रवाई न हुई तो धरना प्रदर्शन कर करेंगी। सीओ सिटी श्रीकांत प्रजापति ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
तालग्राम थाना क्षेत्र के गांव खबरामऊ कुडरी के बीच राष्ट्रीय पक्षी मोर के शिकार करते समय 12 जुलाई 2014 को इंदरगढ जगतपुर निवासी परशुराम गिहार को तत्कालीन थाना प्रभारी राजा भैया और सिपाही रामबीर, प्रभाकर ने खदेड़ रहे थे। पुलिस से बचने के प्रयास में परशुराम ईशन नदी में कूद गया था। इससे उसकी मौत हो गई थी। मृतक शिकारी की पत्नी उषा देवी ने पुलिस टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने बैसापुर निवासी जगवीर पुत्र नाथूराम , खबरामऊ निवासी फूलचंद्र पुत्र बाबूराम पर हत्या का मुकदमा लादकर जेल भेज दिया था।
तालग्राम के गांव माधौनगर में जनवरी माह में अवैध खनन की सूचना पर छापा मारने पहुंचे तत्कालीन सीओ सदर लक्ष्मीकांत गौतम पर खनन माफियाओं ने ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया था। किसी तरह वह बच गए थे और तीन लोगों को पकड़ तालग्राम पुलिस को सौंपा था। सीओ पर हुए हमले में पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई को दूर मुकदमा तक नहीं दर्ज किया था। तत्कालीन एसपी हरिशचंद्र ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया लेकिन जांच का परिणाम ही नहीं निकला। पूरा महकमा अपने ही अफसर को आज तक इंसाफ नहीं दिला सका।
दलित परिवार पर खाकी ने बरपा था कहर
दो साल पहले आधी रात को जबरिया घर में घुसे थे कोतवाल
परिवार को बेरहमी से पीटा था, पुलिस की जांच में दबा मामला