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पिता-पुत्र और ताऊ की मौत से कोहराम

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छिबरामऊ। कसावा क्षेत्र के कठाहार गांव में एक साथ उठी तीनों अर्थियों से हर कोई सन्न है। परिजनों ने दोपहर बाद बिना किसी को सूचना दिए अमित का अंतिम संस्कार कर दिया। अब हर किसी की जुबां पर यही प्रकरण है।
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अमित दिल्ली में रहकर एक निजी कंपनी में नौकरी करता था, जबकि उसके पिता जसकरन गांव में ही राजमिस्त्री थे। ताऊ तक राकेश अपने परिवार के साथ दिल्ली में ही रहते थे। पांच दिन पहले अमित ताऊ राकेश के साथ होली मनाने के लिए गांव आया था। अब अचानक तीन मौतों से होली की खुशियां मातम में बदल गईं हैं। अमित के शव पर उसके बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल था। अमित के परिवार में पत्नी आरती के अलावा एक बेटा व दो बेटियां हैं।
दबी जुबान में ग्रामीणों का कहना है कि दोपहर को जब अमित का शव सैफई से आया तो परिजनों ने किसी को सूचना दिए बिना गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। अब उसके पिता व ताऊ की मौत से यह गुत्थी और भी उलझ गई है।
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इधर, पुलिस की माने तो जहर खाने से अमित की मौत हुई थी। पिता जसकरन उसकी मौत का गम बर्दाश्त नहीं कर सके, जिससे उनकी भी मौत हो गई। जसकरन ने शराब का सेवन नहीं किया था। हालांकि राकेश की मौत कैसे हुई इसका जवाब पुलिस के पास नहीं है।
बार-बार हो रहीं मौतों से भी नहीं जागा प्रशासन
जनपद में जहरीली शराब से हो रहीं मौतों का यह कोई पहला या दूसरा मामला नहीं है। इससे पहले भी कई लोग दम तोड़ चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
करीब एक सप्ताह पहले जिले के छिबरामऊ इलाके के निवासी एक युवक की फर्रुखाबाद में शराब की वजह से मौत हो गई थी। उस दौरान तीन लोग मर गए थे। 20 मार्च को तो शराब की वजह से मरने वाले तीनों लोग छिबरामऊ क्षेत्र के ही निवासी हैं। इससे पहले नवंबर 2015 में आठ लोगों की मौत जहरीली शराब से हुई थी। उस दौरान पंचायत चुनाव का दौर था। हालांकि जिला प्रशासन ने इस हादसे हो मौत का दूसरा कारण माना था, लेकिन तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी दिनेश कटियार के निलंबन से शराब से मौतों की पुष्टि हो गई थी।
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