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मवेशी व्यापारी के अपहरण और हत्या में दो को उम्रकैद

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कन्नौज। मवेशी व्यापारी का अपहरण कर फिरौती लेने और हत्या करने वाले दो दोषियों को कोर्ट ने गुरुवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। नवंबर 2014 में दोस्तों ने ही मवेशी व्यापारी को गुमराह कर अपहरण कर हत्याकांड को अंजाम दिया था।
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सदर कोतवाली के कुसुमखोर गांव निवासी नजीबुल मवेशियों को खरीदकर बेचने का काम करता था। पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद के थाना कमालगंज के गांव उमराय नगला निवासी मवेशी व्यापारी विमलेश और जगदीश से उसकी जान-पहचान थी। विमलेश और जगदीश ने 25 नवंबर 2014 को नजीबुल का अपहरण कर लिया था। दूसरे दिन दोनों ने नजीबुल के भाई नफीसुल को फोन कर 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। बताए गए स्थान नफीसुल से तीन लाख रुपये ले लिए थे। इसके बाद भी दोनों ने नजीबुल की हत्या कर दी थी।
मामले की विवेचना तत्कालीन निरीक्षक विनोद यादव और गुलाब सिंह ने की थी। कमालगंज के पास गंगा की कटरी से दोनों की निशानदेही पर नजीबुल का शव बरामद किया था।
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गुरुवार को फास्ट ट्रैक द्वितीय न्यायाधीश शिवकुमार तिवारी ने मामले की सुनवाई की।
साक्ष्य और गवाहों की गवाही के आधार पर विमलेश और जगदीश को अपहरण कर हत्या करने का दोषी पाया गया। दोनों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
शासकीय अधिवक्ता संतकुमार ने बताया कि कुसुमखोर निवासी पप्पू और सदरुल ने अपहरण करते देख लिया। इनकी गवाही मुख्य रही है। वहीं इस मामले में साक्ष्य न मिलने पर अभियुक्त मुकेश, बादाम और जगरानी को दोषमुक्त कर दिया गया।
मिल गई ईदी
फैसला आते ही नजीबुल के भाई नफीसुल कोर्ट में घुटनों के बल बैठकर रोने लगा। उसकी आंखों से आंसू छलक आए। उसने बताया कि वह नमाज कर भाई के हत्यारोपियों को मौत की सजा की मांग करता था। ईद से पहले कोर्ट ने सजा सुनाकर इंसाफ किया है। ईद से पहले उसे कोर्ट ने ईदी दी है।
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