सूखे के बाद पिछले महीने बेमौसम बारिश और ओले से तबाह हुए किसानों के जख्म पर मरहम लगाने के लिए सरकार ने जो मुआवजा दिया है, उससे कई किसान तो दोबारा जुताई तक नहीं करवा पाएंगे। चार हेक्टेयर भूमि धारक किसान को 18000 रुपये और लघु सीमांत किसानों को महत 750 रुपये बतौर मुआवजा बांटे गए हैं।
किसानों का कहना है कि जो रकम मिली है, वह क्षति के अनुपात में ऊंट के मुंह में जीरे जैसी है। कहने को तो सरकार ने फसल नुकसान का मुआवजा दोगुना कर दिया है, मगर वह कब मिलेगा किसी को पता नहीं। कम मुआवजे के सवाल पर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फौरी राहत के तौर पर मुआवजे का जो फार्मूला सरकार ने तय किया है, उसका अनुपालन करने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है।
बारिश और ओले से जिले की तीन तहसील क्षेत्रों (सदर, तिर्वा व छिबरामऊ तहसील क्षेत्र) में 1421 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल की फसल 50 फीसदी से ज्यादा हुई है। वहीं 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा की फसल में भी 25 से 50 फीसदी तक का नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल गिरने और पानी भर जाने के कारण 60 से 70 फीसदी तक पैदावार प्रभावित हुई है।
लेकिन मुआवजा बहुत कम दिया जा रहा है। कई किसानों को तो बर्बाद फसल का दस फीसदी मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। जिन किसानों के पास चार हेक्टेयर भूमि है उन्हें अधिकतम 18 हजार रुपये का ही मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि जुताई, बुवाई, सिंचाई और पैदावार पर करीब चार लाख रुपये खर्च हुए हैं।
छोटे किसानों को न्यूनतम 750 रुपये मुआवजा दिया जा रहा है, इससे दोबारा खेत की पूरी तरह से जुताई तक संभव नहीं है। तय सरकारी रेट से मुआवजा दिया जाता तो यह धनराशि (असिंचित, सिंचित क्षेत्र के लिए) 72 हजार रुपये होती। यही नहीं मुआवजा चेक से दिया गया है, जिसका भुगतान कराने से पहले किसान को बैंक में खाता खुलवाना होगा।
एक लेखपाल ने बताया कि नियमानुसार चार हेक्टेयर बर्बाद किसान का 72 हजार रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिए पर आदेश अधिकतम 18000 रुपये की चेक देने का है। इसी का अनुपालन किया जा रहा है। एक या दो बीघा जमीन की बर्बाद फसल पर मात्र 750 रुपये ही मुआवजा दिया जा रहा है, जिन किसानों की 25 फीसदी फसल की क्षति हुई है, उन किसानों को भी मुआवजा दिए जाने का ऐलान किया गया है।
बैंक अफसर बोले, उनसे कोई लेना-देना नहीं
तिर्वा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़नपुर वीरहार निवासी सूरजभान तिवारी ने बताया कि फसल दुर्घटना बीमा योजना को लेकर बैंकों का रवैया बेहद उदासीन है। उन्होंने आयावर्त ग्रामीण बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था। तब 4700 रुपये की धनराशि प्रीमियम के तौर पर काट ली गई। इससे किस फसल का बीमा हुआ ? इसका जवाब बैंक अधिकारी नहीं दे रहे हैं। जब बैंक अफसरों से बीमा क्लेम के संबंध में कहा जाता है तो वे यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि बीमा क्लेम मिले चाहें न मिले, उनसे कोई लेनादेना नहीं है।
किसान उपभोक्ता फोरम जाने लायक भी नहीं
वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद त्रिवेदी कहते हैं कि फसल दुर्घटना बीमा योजना किसानों के साथ छल के समान है। तमाम किसान उपभोक्ता फोरम में केस करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास अभिलेख ही नहीं हैं। बैंक या कृषि विभाग अथवा बीमा कंपनी ऐसे कोई कागजात नहीं दे रही है, जिससे साबित हो सके कि किसान का बीमा है। इसके अलावा आवेदन की प्रक्रिया भी नहीं है, जिस कारण किसान यह साबित ही नहीं कर सकता कि उसने बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति मांगी। न मिलने पर उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
बैंक पास बुक में इंट्री करें व ग्राहकों को बताएं
उप निदेशक कृषि डा. राजेश कुमार का कहना है कि बैंक अफसरों की जिम्मेदारी है कि वे प्रीमियम काटते वक्त किसानों को बताएं कि उन्होंने उनकी किस फसल की बीमा के लिए कितनी धनराशि प्रीमियम के तौर पर काटी है। केवल प्रीमियम काट लेने तक ही बैंक की जिम्मेदारी सीमित नहीं है। जो किसान फसल दुर्घटना बीमा के संबंध में जानकारी करने बैंक पहुंच रहे हैं, उन्हें जानकारी बैंक स्टाफ को देनी चाहिए। किसानों को कोई समस्या हो तो उनके मोबाइल 9235659533 पर बताएं।
प्रीमियम जानकारी को पासबुक देखें किसान- एलडीएम
ॎ लीड बैंक मैनेजर एचपी सिंह का कहना है कि किसान पासबुक में देखें कि प्रीमियम कटा है या नहीं। यदि कोई मैनेजर या बैक कर्मचारी उन्हें फसल बीमा संबंधी जानकारी नहीं देता है तो वे उन्हें मोबाइल नंबर 8392947537 पर बताएं। उन्होंने कहा कि बैंके अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभा रही हैं। वे इस मामले को लेकर पूरी तरह से सक्रिय हैं, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
बैंक या कृषि विभाग न सुनें तो यहां करें शिकायत
डीएम अनुज कुमार झा 9454417555
एडीएम रमेश चंद्र 9454417626