हंसलोक जनकल्याण समिति के तत्वाधान में कैलाश मार्केट
में आयोजित सत्संग में दिल्ली से आई साध्वी हरिप्रिया ने कहा कि गंगा
स्नान से तन का मैल धुलता है, पर मनका मैल साफ करने को सत्संग ही एक मात्र
साधन है। कहा कि कलियुग में ध्यान लगाकर हरि भजन करने वाला प्रभु कृपा का
पात्र बन जाता है।
वैसे तो सभी के ह्रदय में हरि का वास है, पर जब तक भजन
सुमिरन और ध्यान से उस हरि को जाना नहीं, तब तक जीव का कल्याण संभव नहीं।
सुरेश सिंह ने भजन सुनाया कि मेरो मन लागे हरी सत्संग में। मिथलेश सिंह ने
एकहि धर्म एक वृत नेमा, काम वचन हरि मन हरि पद प्रेमा की व्याख्या की।
रामजीत सक्सेना ने यदि त्रेता में राम न होते..भजन सुनाकर वाहवाही लूटी।
संचालन कर रहे रामसनेही लाल शर्मा ने भजन अरे मन किस पर फूला है ..,
रामेंद्र सिंह ने भजन मिले कोई ऐसो संत फकीर लगाय दे भव दरिया के तीर
सुनाया। सत्संग में प्रधानाचार्य सतीश चंद्र, राधेश्याम, बाबूराम, बाबा
जिलेदार आदि ने भी भजन सुनाए।