फोटो :02: नेत्र ओपीडी में पसरा सन्नाटा। संवाद
तिर्वा। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावों की पोल सीएचसी तिर्वा खोलता नजर आ रहा है। करीब एक वर्ष से तैनाती के बाद गायनोलॉजिस्ट नदारद चल रहे हैं जिससे प्रसूताओं को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। महिला और पुरुष विंग मिलाकर कुल 60 बेड के मानक वाले इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र 37 बेड पर ही उपचार की व्यवस्था है। इससे गंभीर मरीजों को भर्ती करने में दिक्कत आती है और अक्सर रेफर करना पड़ता है।
पुरुष विंग में 30 बेड के स्थान पर केवल सात बेड ही उपलब्ध हैं जिससे स्टाफ पर लगातार दबाव बना रहता है। पिछले महीने पहुंचे 53 गंभीर मरीजों में से 19 मरीजों को हालत नाजुक होने पर रेफर करना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि पर्याप्त बेड और विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पाता है।
वहीं महिला विंग में भी स्थिति चिंताजनक है। अक्तूबर माह में कुल 191 प्रसूताओं का प्रसव कराया गया जिसमें गायनोलॉजिस्ट न होने के चलते 17 महिलाओं को रेफर किया गया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. राजन शर्मा ने बताया कि सीएचसी में तैनात गायनोलॉजिस्ट डॉ. मो. असलम पिछले एक साल से नदारद चल रहे हैं। उच्चधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। पुरुष विंग में बेड की कमियों के संबंध में विभाग को पत्र भेज चुके हैं।