किसानों की सिंचाई समस्या को हल करने के लिए जसोदा लिफ्ट कैनाल को पक्का करने का काम अधर में लटक गया है। बजट के अभाव में करीब एक साल में नहर का एक किलोमीटर हिस्सा ही पक्का किया जा सका है। ऐसे में फसल सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलने का सपना किसानों के लिए सपना बन कर रह गया है।
कुल 8.4 किलोमीटर लंबी जसोदा लिफ्ट कैनाल को काली नदी से मोटरों के माध्यम से पानी मिलता है। जसोदा क्षेत्र के जिन गांवों से होकर नहर निकली है, वहां की मिट्टी बालूदार होने के कारण नहर की पटरी जर्जर हो चुकी है। ऐसे में सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने पर पटरी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो जाती है।
बारिश के मौसम में भी नहर की कच्ची पटरी की मिट्टी का तेजी से कटान होता है। बार-बार खांदी हो जाने से नहर की टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते वर्ष 2014 में नहर को पक्का करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया। कई महीनों की खींचतान के बाद मंजूरी भी मिल गई। लेकिन नलकूप खंड की इस महत्वाकांक्षी योजना को बजट की कमी ने लक्ष्य तक नहीं पहुंचने दिया।
नलकूप खंड कार्यालय ने चार करोड़ 83 लाख रुपये का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा था। लेकिन शासन ने मात्र एक करोड़ 83 लाख रुपये की धनराशि ही स्वीकृत की। इसमें से पहली किश्त के तौर पर 91 लाख रुपये ही मिले। इस धन से केवल एक किलोमीटर लंबाई तक ही नहर पक्की हो सकी।
सहायक अभियंता गिरीश चंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि जितना बजट मिला, उतने को खर्च कर काम करा दिया गया है। आगे के हिस्से को पक्का तभी कराया जा सकेगा जब शासन से बजट मिलेगा। नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता एसके त्रिवेदी का कहना है कि नहर की सारी स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। यदि मांग के अनुरूप शत-प्रतिशत बजट मिलता तो नहर का कायाकल्प हो जाता। अवशेष बजट आवंटन के लिए प्रयास किया जा रहा है।
....फैक्ट फाइल
ॎ जसोदा लिफ्ट कैनाल 70 के दशक में बनी थी।
ॎ कैनाल की कुल लंबाई 8.40 किलोमीटर है।
ॎ 1280 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए पानी देने की क्षमता।
ॎ एक दशक से सिर्फ 500 से 600 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल की हो पा रही सिंचाई।
ॎ वैसावारी, तेरारागी, कूलापुर, जसोदा, सरैंया, श्याम नगला आदि गांवों की फसलें निर्भर।
नया पंप सेट और स्टेप्लाइजर आया
जसोदा लिफ्ट कैनाल में जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए नया मोटर पंपसेट लगाया गया है। वहीं वोल्टेज की समस्या का समाधान कराने के लिए स्टेप्लाइजर स्थापित किया गया है। उम्मीद है कि इस बार किसानों को बीते सालों की तुलना में अधिक क्षमता में पानी मिल सकेगा। काली नदी से नहर में पानी लिफ्ट करने के लिए यहां दो पंपसेट लगाए गए थे।
इनकी क्षमता 10-10 क्यूसेक पानी आपूर्ति की थी। एक पंपसेट कई साल पहले नदी में उलट गया था। इस कारण एक पंपसेट से ही काम चलाया जा रहा था। उसकी हालत जर्जर होने पर सिंचाई व्यवस्था बाधित होने लगी। नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता एसके त्रिवेदी ने बताया कि 13 लाख रुपये की लागत से नया पंपसेट मंगाया गया है। इसे नदी किनारे स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। बिजली के वोल्टेज को मेनटेन रखने के लिए 25 लाख रुपये लागत का स्टेप्लाइजर मंगाया गया है।