जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में राजनैतिक दलों की सुस्ती के चलते बाजार बंदी असफल रही। रोज की तरह लोगों ने अपनी दुकानें खोली। ग्राहक भी दुकानों में पहुंचे। वहीं बैंकों में लोग लाइन में लगे रहे। बंदी असफल होने से नोटबंदी के फैसले को आम आदमी का बल मिलता दिखाई दिया।
अमोलर प्रतिनिधि के अनुसार - रोजमर्रा की तरह बाजारों में रौनक रही, सुबह से शाम तक चहल-पहल बनी रही। सोमवार को तालग्राम का साप्ताहिक बाजार होने के कारण एक भी दुकान बंद नहीं रही। ग्रामीण क्षेत्रों से आए ग्राहकों ने अपने घरेलू उपयोग की जमकर खरीददारी की। क्षेत्र के ताहपुर, अमोलर, बरगावां, सतौरा में भी बाजार बंदी का कोई प्रभार नहीं पड़ा। यहां पर किसी पार्टी नेता ने बाजार बंद कराने का प्रयास नहीं किया।
समधन प्रतिनिधि के अनुसार - नगर के किराना दुकानदार असलम व रामकेश गुप्ता ने बताया कि 500 व एक हजार के नोट बंद होने से रोजमर्रा की बिक्री पर असर पड़ा है। ग्राहकों के पास फुटकर रुपये न होने की समस्या है। जहां दो-तीन हजार की रोजाना बिक्री होती है। वहां 500 व 800 रुपये में सिमट रही है। दुकान पर ग्राहकों के इंतजार में बैठे रहते हैं। मलिकपुर कस्बा में बंदी का कोई असर नहीं दिखा। यहां पर कोई विपक्षी नेता केंद्र सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं आया और न ही कोई धरना प्रदर्शन हुआ। दुकानदारों ने रोज की तरह दुकानें समय पर खोली। कस्बा के किराना दुकानदार नरेश चंद्र व निहाल खां, शैलेंद्र सिंह, मिठाई दुकानदार हरि गोविंद, विश्वनाथ वर्मा ने बताया कि बाजार बंदी का कोई असर नहीं रहा है। यहां रोज की तरह दुकानें खुली रहीं।
तिर्वा प्रतिनिधि के अनुसार - बंदी के आह्वान के बाद भी कस्बे के बाजार खुले रहे। बाजार बंद कराने को विरोधी दलों का कोई भी नेता सामने नहीं आया। रोजमर्रा की तरह व्यापारियों ने सुबह से अपने प्रतिष्ठान खोले। पूरे दिन बाजार में चहल-पहल व भीड़भाड़ रही। गल्ला मंडी, आलू मंडी में किसान की भीड़ खरीद व बिक्री के लिए लगी रही।
ठठिया प्रतिनिधि के अनुसार - बाजार बंदी ठठिया में बेअसर रही। यहां दुकानें खुली रहीं। इसी प्रकार उमर्दा में भी बाजार बंदी असफल रही।
तेराजाकेट प्रतिनिधि के अनुसार - कस्बा तेराजाकेट में रोज की तरह बाजार खुला रहा। स्थानीय दुकानदार राजेश कुमार, संजीव बाथम, नन्हे, रोहित, राजू बाथम, रामशरण आदि ने कहा कि वह एक घंटा देर तक दुकानें खोली।