राजकीय मेडिकल कालेज में बुधवार को विश्व कैंसर दिवस के मौके पर एक सेमिनार का आयोजन हुआ। इसमें कैंसर रोग से संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बीमारी के लक्षण व रोकथाम के उपाय सहित तमाम जानकारियां मेडिकल स्टूडेंट्स को दीं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के मुताबिक वर्ष 2014 के दौरान देशभर में 5 लाख लोगों की मौत कैंसर से हुई है। कैंसर अब लाइलाज नहीं रहा है।
सेमिनार की शुरूआत मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. वीएन त्रिपाठी ने की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कैंसर को रोकने के लिए 4 फरवरी 1933 को प्रथम बार पूरे विश्व में जागरूकता अभियान चलाया गया था। तभी से इस दिवस को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि बच्चों में कैंसर की बीमारी सबसे अधिक पायी जा रही है। देशभर में हर साल औसतन 40 हजार बच्चे कैंसर की बीमारी से प्रभावित होकर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। बच्चों में ब्लड कैंसर व ब्रेन कैंसर की अधिक संभावनाएं पायी जा रही हैं।
कैंसर रोग के चिकित्सक डा. राजेंद्र कुमार ने कहा कि देश में सबसे पहले 1975 में कैंसर कंट्रोल कार्यक्रम शुरू हुआ। यह बीमारी अत्यंत खतरनाक है। शरीर के किसी भी हिस्से में यदि गांठ है, दर्द होता है अथवा नहीं तो भी तुरंत इसकी जांच कराएं। जांच की सुविधा मेडिकल कालेज में उपलब्ध है।
शुरूआती दौर में ही जानकारी होने पर इस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। ईएनटी के विभागाध्यक्ष डा. संदीप कौशिक ने बताया कि तंबाकू चबाने, सिगरेट पीने से मुंह, दांत व जबड़ों में कैंसर की संभावनाएं हो जाती हैं। इसके लिए लाइफ स्टाइल को चेंज कर लें। धूम्रपान व अल्कोहल से परहेज करें।
गायनी की सीनियर रेजीडेंट अनामिका शुक्ला ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में जागरूकता के अभाव में गर्भाशय का कैंसर अधिक होता है। इससे बचाव के लिए 16 से 25 वर्ष के बीच महिलाओं को कैंसर निरोधक टीके लगवा लेने चाहिए।
सेमिनार को चिकित्सा शिक्षक डा. प्रदीप खारया, ब्लड बैंक के इंचार्ज डा. एसके ध्रुव, रेडियोलाजी के प्रवक्ता डा. एनसी यादव ने भी संबोधित कर तमाम जानकारियां उपलब्ध कराईं। इस मौके पर चिकित्सा शिक्षक डा. नेहा गुप्ता, डा. पूजा गुप्ता, डा. संजीव त्रिपाठी, सीएमएस डा. दिलीप सिंह, अभिषेक यादव सहित तमाम चिकित्सक व स्टूडेंट्स मौजूद रहे।