जिले में घर-घर उजाला पहुंचाने की मुहिम नए साल में रफ्तार पकड़ेगी। आधा दर्जन पावर स्टेशन ओवरलोडिंग की दिक्कत दूर करेंगे। तिर्वा में अंडरग्राउंड केबिल से बिजली आपूर्ति की जाएगी।
कई क्षेत्रों में बिजली की लाइनें बदल जाने से कम होंगे फाल्ट। लोकल कटौती बंद होने से लोग 24 घंटे बिजली का लुफ्त उठा सकेंगे। वहीं तीन सौ से अधिक गांवों का विद्युतीकरण पूरा होने से इन गांवों में पहली बार उजाला पहुंचेगा।
तिर्वा कसबे में अंडरग्राउंड बिजली लाइन डालने का काम मार्च 2015 तक पूरा हो जाएगा। इससे कस्बे में आंधी-तूफान में तार टूटने, ट्रक समेत अन्य भारी वाहनों के गुजरने के दौरान पोल उखड़ने, तार ढीले होने और बिजली चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
इसी तर्ज पर कन्नौज नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों को भी अंडरग्राउंड केबिल डालने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। जनवरी महीने में इसका सर्वे शुरु हो जाएगा। दिल्ली की कंपनी सर्वे के बाद स्टीमेट भेजेगी। इसके बाद सरकार करीब 70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर काम कराएगी। इस आशय का फरमान खुद मुख्यमंत्री जिला प्रशासन के पास भेज चुके हैं।
मतौली में विद्युत उप केंद्र मार्च अंत तक पूरा हो जाएगा। इससे मतौली क्षेत्र के 50 गांवों को बिजली मिल सकेगी। सकरावा में उप केंद्र बनकर तैयार होगा, जो 70 गांवों की बिजली आपूर्ति बेहतर करेगा। विशुनगढ़ में विद्युत उपकेंद्र तैयार होने के बाद 60 गांवों को रोशन करने का सपना साकार कर सकेगा।
गंगा व काली नदी के बीच कटरी इलाके में बसे गुगरापुर विद्युत उपकेंद्र पर लगे ट्रांसफार्मर की क्षमता 5 एमवी से बढ़ाकर 10 एमवी की जाएगी। इसी तरह ठठिया उप केंद्र पर 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाकर 15 एमवीए कर दी जाएगी। हसेरन विद्युत उप केंद्र पर 5 एमवीए के ट्रांसफार्मर की क्षमता 10 एमवीए कर दी जाएगी।
इसी तरह सौरिख और बहबलपुर उप केंद्र पर ट्रांसफार्मर की क्षमता 15 एमवीए कर दी जाएगी। इससे लोगों को लो वोल्टेज की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। इस काम पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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1200 मजरे इसी साल होंगे रोशन
अधिशासी अभियंता विद्युत पी.राम ने बताया कि सौ परिवारों वाले आंशिक विद्युतीकृत मजरों का पूरी तरह से विद्युतीकरण किया जाएगा। इन्हें चिह्नित कर लिया गया है। ऐसे मजरे करीब 1200 हैं। इनकी सूची तैयार कर ली गई है। वर्ष 2015 में इन सारे मजरों को बिजली का उजाला देने का काम कराया जाएगा। इस पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होगा।
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राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना भी पूरी होगी
राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत चल रहा काम भी इस साल पूरा हो जाएगा। शासन और प्रशासन के स्तर से की गई कार्रवाई का असर दिखने लगा है। कुछ गांवों में जनवरी महीने से ही बिजली आपूर्ति चालू हो जाएगी, जबकि कई गांवों में मार्च तक रोशनी पहुंचेगी। इसके साथ ही टीमों की संख्या बढ़ाकर जून तक सभी चयनित गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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अगले साल उपभोक्ताओं को लोकल फाल्ट से काफी हद तक निजात मिल जाएगी। अक्सर स्थानीय स्तर पर फाल्ट के कारण बाधा आती है। कभी ट्रांसफार्मर फुंकने से बचाने के लिए तो कभी तारों को टूटने से रोकने के लिए बिजली काटनी पड़ती है। जब पावर स्टेशनों की क्षमता ज्यादा होगी और ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ जाएगी तो उन पर लोड घट जाएगा। ऐसी स्थिति में स्पार्किंग, ट्रांसफार्मर फुंकने, जंफर उड़ने की समस्या कम हो जाएगी।
-पी. राम, अधिशासी अभियंता विद्युत
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यह होंगे लोगों को फायदे
-बेहतर बिजली मिलने से छोटे उद्योग-धंधे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दे सकेंगे।
-गांव में बिजली पहुंचने पर लोग खेतों की सिंचाई कर सकेंगे। किसानों के फसल की लागत कम होगी।
-शाम के वक्त बिजली कटौती नहीं करनी पड़ेगी। इससे छात्र-छात्राएं की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।