जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में सांस्कृतिक
कार्यक्रम के दौरान भारत विरोधी नारेबाजी करने वालों के खिलाफ कठोर
कार्रवाई की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी ने तिर्वा क्रासिंग पर जेएनयू
अध्यक्ष कन्हैया कुमार का पुतला फूंककर अपना विरोध जताया।
सपाइयों ने
कहा कि ऐसे लोगों को देश में रहने का कोई हक नहीं है। इनको फांसी की सजा
मिलनी चाहिए। पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव ने कहा कि जेएनयू में
आतंकवादी अफजल गुरू की बरसी पर कल्चरल प्रोग्राम आयोजित किया गया। इसमें
भारत विरोधी नारे लगाते हुए उस आतंकवादी को शहीद बताया गया।
ऐसे लोगों को
तो देश से खदेड़ देना चाहिए। सयुस के प्रदेश सचिव जुनैद हसन ने कहा कि उस
कार्यक्रम में भारत विरोधी नारे लगाने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार कठोर
कार्रवाई करे। इस मौके पर सतेंद्र यादव, अमित मिश्रा, एतिशाम हुसैन बिल्लू,
तौसीफ कुरैशी, कौशर खां, शिवम मिश्रा, आसिफ सिद्दीकी सहित अन्य मौजूद थे।
उधर,
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी भारत विरोधी नारे लगाने की कड़े
शब्दों में निंदा की। वामपंथी छात्र संगठन एआईएसएफ, एआईएसए, एसएफआई ने
गतिविधियों को देशद्रोही घटना करार देते हुए जेएनयू यूनिवर्सिटी दिल्ली में
अफजल गुरू जैसे आतंकवादी को शहीद बताने और राष्ट्र विरोधी नारे लगाने पर
संगठनों को पूरी तरह से वैन करने की मांग की।
कहा कि ऐसे लोगों का समर्थन
करने वालों पर राष्ट्रदोह का मुकदमा दर्ज हो। कहा कि ऐसी गतिविधियां भारत
की एकता, अखंडता के साथ खिलवाड़ कर रही है। इस मौके पर जिला संयोजक सुमित
प्रजापति, अंकित यादव, देवेंद्र प्रताप, समीर त्रिपाठी, शिवाजी पाल, सौरभ
दुबे, लालजी तिवारी,
हिमांशु दुबे, अमन गुप्ता, चंदन मिश्रा आदि मौजूद थे।
उधर, किसी भी
घटना को लेकर इन दिनों कई राजनीतिक पार्टियों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन
केवल मीडिया कवरेज तक सीमित रह गए हैं। प्रदर्शन तब तक किया जाता है, जब
तक मीडिया के लोग नहीं पहुंच जाते। पुतला फुंकते हुए फोटो खिंचने के बाद 10
मिनट के अंदर पूरी भीड़ गायब हो जाती है। तिर्वा क्रासिंग पर भी शनिवार को
कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया।