बीएसएनएल विभाग की हालत दिन पर दिन पतली होती जा रही
हैं। ढेर सारी योजनाएं भी विभाग को उबार नहीं पा रही है। बस ब्राडबैंड के
सहारे पूरा विभाग टिका हुआ है। लगभग 40 लाख रुपये की महीने भर में टेलीफोन
बिलों से वसूली करने वाला विभाग अब पूरे महीने में नौ लाख की वसूली कर पा
रहा है।
हालत यह है कि छिबरामऊ डिवीजन में जितने अफसर और कर्मचारी हैं,
उनकी सेलरी ही 11 लाख रुपये से ऊपर की है और दैनिक खर्च अलग। विभाग ढेर
सारी योजनाओं के बाद भी लोगों के बीच अपनी खोई लोकप्रियता हासिल नहीं कर पा
रहा है। सब डिवीजन क्षेत्र में 11 एक्सचेंज जुड़े हैं, जिसमें छिबरामऊ के
दो, प्रेमपुर, सौरिख, विशुनगढ़, सकरावा, खड़िनी, तालग्राम, सिकंदरपुर, सराय
प्रयाग और गुरुसहायगंज एक्सचेंज शामिल है।
केवल छिबरामऊ और गुरुसहायगंज
में विभाग के स्वयं के भवन हैं, जबकि अन्य जगहों पर किराए के भवन में
एक्सचेंज संचालित है। इन 11 एक्सचेंजों में 17 नियमित कर्मचारी है। विभागीय
आंकड़ों के मुताबिक इन सभी का वेतन ही 11 लाख रुपयेसे अधिक है। कभी इन
एक्सचेंजों में दो हजार से ज्यादा टेलीफोनों की संख्या होती थी।
अब हालत
यह है कि महज 400 टेलीफोन बचे हैं, जिसमें अधिकांश ब्राडबैंड की बदौलत ही
चल रहे है। ग्रामीण इलाकों में एक सैकड़ा के करीब ब्राडबैंड वाईमेक्स
कनेक्शनों की संख्या है, वहीं विभाग ने बेसिक फोन में ढेर सारी योजनाएं दे
रखी हैं, जिसमें रात नौ बजे से सुबह सात बजे तक बेसिक और मोबाइल पर फ्री
में बात करने की योजना हैं।
इसके बावजूद भी कनेक्शनों की संख्या पर कोई असर
नहीं पड़ा। नवंबर में मोबाइल के पोस्टपेड और टेलीफोनों के बिलों से महज नौ
लाख रुपये विभाग के कोष में जमा हो पाएं हैं। ढेर सारी योजनाओं के चलते
अगर कोई नया कनेक्शन कराने भी जाता है तो अधिकतर मोहल्लों में केबिल ही
नहीं पड़ी है।
कहीं पेयर नहीं तलाशे मिल रहे है। ऐसी हालत में नए
उपभोक्ताओं के जुड़ने का सवाल ही नहीं उठता। यह योजनाएं उन्हें मुंह ही
चिढ़ाती है। इतना ही नहीं विभाग में क्या योजना चल रही है किसी को नहीं
पता। विभाग आम जनमानस तक अपनी योजनाओं को पहुंचा ही नहीं पाता है। यहां
तक विभाग की बिल्डिंग में भी कई योजनाओं से संबंधित सामग्री नहीं लगी है।