तालग्राम (कन्नौज)। क्षेत्र के कई गांव में आर्थिक उन्नति के लिए किसान सब्जी वर्गीय फसलों में बैंगन की खेती अच्छे तरीके से करते है। इस वर्ष मौसम की बेरुखी से बैंगन फसल प्रभावित हो रही है। कीट व धब्बा रोग से बैंगन पैदावार किसान परेशान हैं। जबकि, कृषि वैज्ञानिक फसल बचाव व पैदावार बढ़ाने के उपाय सुझा रहे हैं।
किसान सतीश चंद्र निवासी अमोलर का कहना है पिछली वर्ष बैंगन खेती में अच्छी पैदावार हुई थी। इस साल मौसम के उतार चढ़ाव से फल भेद कीट लग गया, जिससे काफी नुकसान हो रहा है। खेत में 10 किलोग्राम बैंगन निकलता है, जिसमें चार किलो खराब होता है। अबकी बार फसल घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसान रामचंद्र कैथनपुर्वा ने बताया बैंगन फसल में सूडी, फल छेदक, सफेद मक्खी, लाल मकड़ी, लगता है। इस वर्ष फल छेदक कीट व धब्बा रोग से फसल के पैदावार में काफी कमी आई है। भाव भी अच्छे नही है। जो दवा का छिड़काव कृषि वैज्ञानिकों की राय से किया है। वह कारगर नही हो पा रहा है। किसान राजपाल अमोलर का कहना है एक एकड़ में बैंगन की खेती की। तीन दिन बाद तोड़ कर बाजार ले जाते है। सूडी कीट से काफी नुकसान हुआ है। कृषि अनुसंधान केंद्र अनौगी के डा बीके कनौजिया का कहना है। फल तोड़ कर लेंमडा सायहैलोथ्रीन पांच प्रतिशत प्रतिशत डेढ़ एमएल की मात्र एक लीटर पानी डाल कर छिड़काव करें, कीटों से छुटकारा मिलेगा। धब्बा रोग में ग्रसित पत्तियों व पौधों को तोड़ कर जमीन में गड़ा दे। मैंकोजिव 75 प्रतिशत का ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। जैविक कीट नाशक नीम तेल की पांच मिलीलीटर को दो मिली चिपचिपे पदार्थ में मिला कर एक लीटर पानी में मिलाकर डाले, ज्यादा अच्छा रहता है।