तालग्राम। धूल भरी हवाओं के बीच गेहूं की मड़ाई से लोगों की सांस फूल रही है। सीएचसी की ओपीडी में ऐसे मरीजों की भरमार है। ओपीडी में 25 से अधिक मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। सांस उखाड़ने वाली खांसी से मरीज परेशान हैं। बच्चों पर भी अस्थमा का असर है। कई मरीजों की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें ऑक्सीजन से राहत दी जा रही है। साथ ही उल्टी-दस्त ,बुखार के मरीज भी बढ़े हैं।
सांस की समस्या वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सीएचसी में विशेषज्ञ नहीं है। बृहस्पतिवार को सौ मरीजों में 25 लोग सांस की समस्या से परेशान ओपीडी में आए। जबकि उल्टी-दस्त और बुखार के मामले भी बढ़े हैं। प्रभारी डॉ. कुमारिल मैत्रेय ने बताया कि अस्थमा सांस से जुड़ी बीमारी है, इसमें मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है। इस बीमारी से सांस की नली में सूजन या पतलापन आ जाता है। इससे सांस लेते समय फेफड़ों पर अधिक दबाव महसूस होता है और मरीज की सांस फूलने लगती है। इसके अलावा मरीज को खांसी होने लगती है और सीने में जकड़न होने लगती है। ऐसे मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है।
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बच्चों में भी दिख रहे अस्थमा के लक्षण
डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने बताया कि बच्चों में अस्थमा के लक्षण दिख रहे हैं। रात के समय अधिक खांसी हो रही है। दवाओं के साथ इनहेलर देने की भी जरूरत पड़ रही है। ऐसे वातावरण में बच्चों का अधिक ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मौसम में धूल ज्यादा उड़ती है। इससे सांस रोगियों की मुश्किलें बढ़ जाती है। भूसे के कण इतने बारीक होते हैं कि वह दिखाई भी नहीं देते और सांस से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है, ऐसे रोगी ओपीडी में पहुंच रहे हैं। यदि ज्यादा दिक्कत हो तो तुरंत इलाज कराना चाहिए।
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अस्थमा के लक्षण
-सांस फूलना, लगातार खांसी आना।
-छाती में कफ जमा होना।
-सांस लेने में परेशानी होना।
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ऐसे करें बचाव
-मड़ाई क्षेत्र से दूरी बनाकर रखें।
-धूप में काम करने से बचें।
-सिर को ढककर ही घर से निकले।
-धूल से बचाव के लिए मास्क का प्रयोग करें।
-निमोनिया का टीका लगवाएं।
-धूम्रपान न करें और गर्मी से बचाव करें।