कन्नौज। जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के एक हजार से ज्यादा ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। इनकी चेकिंग न होने से चालक बेखौफ हैं। सहायक उपसंभागीय परिवहन विभाग को शक है कि इनमें कई ट्रैक्टर चोरी के हो सकते हैं। इससे अब विभाग सिर्फ ट्रैक्टरों की चेकिंग कराएगा।
ट्रैक्टरों पर न तो विभाग की और न ही पुलिस की नजर है। सहायक उप संभागीय परिवहन विभाग ने भी इनकी चेकिंग कराने की जरूरत नहीं समझी। अगर विभाग इनकी चेकिंग कराता है तो अधिकतर ट्रैक्टर थाना कोतवाली में बंद करने पड़ेंगे। इसकी मुख्य वजह यह है कि इन ट्रैक्टरों के मालिकों के पास वाहन के कागजात नहीं हैं। जिनके पास हैं भी, वह साथ लेकर नहीं चलते हैं।
विभाग में रजिस्टर्ड ट्रैक्टरों की संख्या 5233 है। इनमें भी कई खामियां हैं। ट्रैक्टरों से मिट्टी खनन जैसे कार्य किए जा रहे हैं। राजनीतिक पहुंच होने से विभाग इन पर हाथ नहीं डालता है। कई ट्रैक्टरों से गांव में खेती की जा रही है। इन्हें शहर नहीं लाया जाता है। विभाग को आशंका है कि यह ट्रैक्टर चोरी के हो सकते हैं। जानकार बताते हैं कि चोरी के ट्रैक्टर कम कीमत पर बिक रहे हैं। इनका पेंट बदलकर बेचा जा रहा है। इस मामले में एआरटीओ का कहना है कि मार्गों पर चेकिंग के दौरान अब ट्रैक्टर भी चेक होंगे। अगर चालक के पास ट्रैक्टर के कागजात न निकले तो ट्रैक्टर को सीज कर दिया जाएगा। बाद में कागजात दिखाने पर ही मुक्त किया जाएगा। चालक का लाइसेंस भी देखा जाएगा।
ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन में फर्जी फोटो, हस्ताक्षर के मामले की जांच शुरू
कन्नौज। ट्रैक्टर खरीदने के बाद एआरटीओ में रजिस्ट्रेशन कराने में बरती गई लापरवाही व फर्जीवाड़े की जांच कराई जाएगी। इसके लिए तहसीलदारों को पत्र भेजा जाएगा। एआरटीओ ने जिले के करीब 30 फीसदी ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन फर्जी हस्ताक्षर व फोटो लगाकर कराने की आशंका जाहिर की है। ट्रैक्टर खरीदने में लगाई गई भूमि में हेराफेरी की बाबत भी जांच के लिए एआरटीओ की ओर से तहसीलदारों को पत्र भेजा जाएगा। अमर उजाला के मामला उठाने के बाद से अवैध ढंग से ट्रैक्टर चलाने वालों में हड़कंप है। विभाग के कुछ कर्मचारी भी फंसते नजर आ रहे हैं। ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन में बरती गई लापरवाही की जांच शुरू हो गई है। पहले दिन दो मामलों में फर्जीवाड़ा मिला। इससे विभाग फाइलों की जांच में जुट गया है। ट्रैक्टर मालिकों से लेकर ट्रैक्टर बेचने वाली एजेंसी के डीलर की भी जांच कराई जाएगी। इन्हें नोटिस भेजने की तैयारी कर ली गई है। जिले में 22 ट्रैक्टर बेचने की एजेंसी हैं। डीलर गांव-गांव जाकर खरीदारों को खोजते हैं। यह कागजात लेकर फाइनेंस के अलावा रजिस्ट्रेशन कराने तक का ठेका लेते हैं। डीलर खरीदार के यहां खुद ट्रैक्टर लेकर पहुंच जाते हैं। चलाने की बात कहकर छोड़कर चले आते हैं। इसके बाद बीमा से लेकर अन्य कागजी कोरम को पूरा किया जाता है। एआरटीओ संजय कुमार झा ने बताया कि फर्जीवाड़े के दो मामले सामने आए हैं। यह तिर्वा रोड के एक ट्रैक्टर डीलर के यहां के हैं। जांच की जा रही है।