विद्युत वितरण निगम की लापरवाही से लाखों रुपये के
ट्रांसफार्मर धड़ाम हो रहे हैं। ट्रांसफार्मरों में लगने वाले फ्यूज पैनल
को टंगस्टन की बजाय एल्युमिनियम धातु का लगाया जा रहा है।
ट्रांसफार्मर
का निर्माण करने वाली कंपनियां ट्रांसफार्मर के साथ ही फ्यूज वायर भी
मुहैया कराती हैं। जिसकी बाजार में कीमत 200 से 300 रुपये तक है। इस फ्यूज
वायर का प्रयोग विभाग किसी भी ट्रांसफार्मर में नहीं करता है। बिजली सप्लाई
के टूटे हुए तारों को लपेट कर ही एक सप्लाई वायर एवं फ्यूज वायर बना दिया
जाता है।
इससे ही ट्रांसफार्मरों को सीधे 11 हजार लाइन से सप्लाई दी जाती
है। ऐसे में अगर ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ा या सप्लाई तेज आई वैसे ही
ट्रांसफार्मर धड़ाम हो जाते हैं। चूंकि एल्युमिनियम का गलनांक ज्यादा होता
है। ऐसे में अगर सप्लाई तेज आती है या ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ता है तो फिर
एल्युमिनियम वायर गलता नहीं है और फ्यूज उड़ने की बजाय ट्रांसफार्मर ही
फुंक जाता है, जबकि टंगस्टन धातु (मिश्रित धातु) का गलनांक कम होता है।
यह
धातु अधिक सप्लाई या फिर अधिक लोड होने पर गल जाता है और ट्रांसफार्मर सेफ
बच जाता है। विभाग ट्रांसफार्मरों की नई खेप आने पर फ्यूज वायर व अन्य
पैनल को चेक नहीं करता और न ही ट्रांसफार्मर का निर्माण कर रही कंपनियों को
लिखता है।
विभाग कंपनियों से आए ट्रांसफार्मरों में एल्युमिनियम का फ्यूज
वायर बनाकर ही लगा देता है, जिससे अक्सर ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं
सामने आती रहती हैं। इस बाबत एसडीओ सुधांशु श्रीवास्तव का कहना है कि पैनल
बनाया जाता है। टंगस्टन धातु का प्रयोग तो नहीं हो रहा है। एल्युमिनियम का
ही वायर लग रहा है। वह इस बारे में और अधिक पता कर लेंगे।