भजन प्रस्तुत करते स्वामी प्रशांतानंदजी महाराज।
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सावन के दूसरे सोमवार देर रात नगर के मंशेश्वरनाथ मंदिर में शिवनाम भजन-कीर्तन की धूम रही। बरसे बदरिया, कैसे भीगे कांवरिया... जैसे भजनों पर भक्त झूमे। हवन-पूजन के साथ आचार्य प्रशांतानंदजी महाराज चंदन ने शिव महिमा का बखान करते हुए कहा कि महादेव सबसे जल्दी प्रशन्न होते हैं। केवल जल से अभिषेक व बेलपत्र समर्पित करने से ही मनवांचित फल दे देते हैं। उन्होंने कहा कि शिवजी के समान जगत में कोई देव नहीं हैं और न ही उनके जैसा कोई देवता है।
शिव भक्ति से ही मिलते हैं प्रभु राम, रामजी को शिवजी से अधिक प्यारा कोई देव नहीं है। सबसे खास बात है रामजी और शिवजी दोनों ही एक-दूसरे को अपना इष्ट मानते हैं। प्रशांतानंदजी ने ...सावन की बरसे बदरिया, कैसे भीगे कांवरिया और ...भोले बाबा-गौरा मइया संग झूला झूल रहे भजन प्रस्तुत किए। भानु चौहान ने ...अनमोल तेरा जीवन यूं ही गवां रहा है। दिलीप श्रीवास्तव ने ...जप ले ओम नम: शिवाय सब संकट कट जाएंगे। धीरज दुबे ने ...राम कहने से तर जाएगा और भूरे दीक्षित ने ...आना पवन कुमारा हमारे हरि कीर्तिन में भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान सुमन मिश्रा, मीरा दीक्षित, सुधा देवी, राधारानी खंडेलवाल, आशा दुबे, गुड्डी, ऊषा मिश्रा, इंदू दुबे, ललू गुप्ता, सुरेंद्र सिंह सेंगर, विमल मिश्रा, आत्मप्रकाश मिश्रा, मोहित राजपूत, अनुराग तिवारी, बाबा भगवानदास, विनोद दुबे, अनूप मिश्रा, संतोष शर्मा, ब्रजेश पाठक आदि मौजूद रहे।