एसएनसीयू वार्ड में बच्ची का इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सुरेश यादव व नर्सिंग इंचार्ज वीरेंद्र
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कन्नौज। शहर के दंपति ने बच्ची को जिला अस्पताल के महिला विंग में संचालित एसएनसीयू (सिक एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) में भर्ती कराया। बच्ची की हालत बेहद गंभीर होने से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सुरेश यादव, नर्सिंग इंचार्ज वीरेंद्र कुमार ने रेडियंट वार्मर व थेरेपी मशीन लगाकर आक्सीजन देने के बाद एंटीबायोटिक दवाएं, इंजेक्शन दिए। बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ।
एसएनसीयू वार्ड में ताजपुर नौकास निवासी दंपति ने 4 सितंबर को पैदा हुई बच्ची की हालत खराब होने पर भर्ती कराया। दंपति ने बताया कि नर्सिंग होम में प्रसव हुआ था। बच्ची साढ़े सात माह में पैदा हुई है। डॉ.सुरेश यादव व नर्सिंग इंचार्ज ने करीब एक घंटे तक बच्ची की हालत में सुधार के लिए प्रयास किया। सफलता नहीं मिली। चिकित्सक ने बताया कि बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। झटके के साथ सांस आ रही है। समय पर उपचार न मिलने के कारण दिमाग में पीलिया चढ़ गया है। बच्ची को कानपुर के हैलट के लिए रेफर किया गया है।
पैथोलॉजी में नहीं आ सकी डेंगू जांच किट
जिला अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में करीब तीन दिन पहले डेंगू किट खत्म हो गई है। किट न होने से डेंगू की जांच रुक गई है। वायरल फीवर व दिमागी बुखार के मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इन्हें बाहर से जांच कराने के लिए लिखा जा रहा है। डेंगू की जांच बंद होने की जानकारी के बाद प्राइवेट पैथोलॉजी संचालकों ने फीस बढ़ा दी है। सीएमएस डॉ.यूसी चतुर्वेदी ने कहा कि किट के लिए वार्ता की गई है। उम्मीद है कि बुधवार तक मिल जाएंगी। इसके बाद दोबारा शुरू हो जाएंगी। वर्ष 2017 में किट से जांच को राज्य सरकार से प्रतिबंधित किए जाने के सवाल पर कहा कि किट के जरिए केवल इस बात का पता लगाया जाता है कि मरीज में डेंगू के लक्षण हैं या नहीं। इसके बाद मेडिकल कालेज भेजकर जांच कराई जाती है।