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बॉयो कचरा जलाने और बॉयो मेडिकल वेस्ट प्लांट बंद होने की होगी जांच

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कन्नौज। तिर्वा सीएचसी में बॉयो कचरा जलाने और मेडिकल कालेज में बंद पड़े बॉयो मेडिकल वेस्ट प्लांट का मुद्दा अमर उजाला के उठाने के बाद डीएम रवींद्र कुमार ने सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने दोनों मामलों की जांच के आदेश जारी किए हैं। बॉयो कचरा जलाने की जांच मेडिकल कालेज के सीएमएस को सौंपी गई है। बंद पड़े प्लांट की जांच मेडिकल कालेज के प्राचार्य करेंगे। डीएम ने साफ कहा है कि बॉयो कचरा जलाने के पीछे जो भी दोषी हों, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस बाबत तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
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15 नवंबर को नोडल अफसर अनिल गर्ग जिले के दौरे पर थे। इसकी जानकारी पर तिर्वा सीएचसी में 14 नवंबर की रात बॉयो कचरा जला दिया गया। शासन के सख्त रुख के बाद भी सीएचसी के जिम्मेदारों में जरा सी भी हिचक नहीं दिखी। दरअसल, 15 अक्तूबर को सीएचसी के निरीक्षण के समय नोडल अधिकारी अनिल गर्ग को परिसर में गंदगी और गेट के समीप बॉयो कचरा मिला था। इस पर उन्होंने फटकार लगा दी थी। अगली बार दौरे में ऐसा मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। नोडल अफसर की चेतावनी के बाद भी सीएचसी में सुधार नहीं दिखा। जिम्मेदार पुराने ढर्रे पर ही काम करते रहे। नोडल अफसर के दोबारा आने की जानकारी पर हड़कंप मच गया। बॉयो कचरा निस्तारित करने के बजाय उसे सीएचसी में जला दिया गया। इस पूरे मामले को अमर उजाला ने शनिवार के अंक में प्रकाशित किया तो डीएम ने संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी।
इसके अलावा अमर उजाला ने मेडिकल कालेज में बॉयो मेडिकल वेस्ट की आड़ में बड़ा खेल होने का मामला भी 13 नवंबर को उठाया था। इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। 400 बेड के राजकीय मेडिकल कालेज में बॉयो मेडिकल वेस्ट प्लांट (इंसीनेरेटर) का 2009 में निर्माण कराया गया था। सिर्फ एक साल चिकित्सीय अपशिष्ट निस्तारित होने के बाद प्लांट बंद हो गया। इससे 2010 से कानपुर की एक निजी संस्था से अपशिष्ट निस्तारण का अनुबंध चल रहा है। करीब 400 बेड वाले मेडिकल कालेज के बॉयो मेडिकल वेस्ट को निस्तारित करने के लिए संस्था को करीब 1.20 लाख प्रति माह यानी 14.40 लाख रुपये सालाना का भुगतान किया जाता है।
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जानकारों का कहना है कि जब मेडिकल कालेज में बॉयो मेडिकल वेस्ट प्लांट है तो उसे ठीक क्यों नहीं कराया जा रहा है। इसे ठीक कराने में करीब 50 हजार का ही खर्चा है। इसकी आड़ में हर महीने एक लाख से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा है। इसके पीछे कमीशन का खेल चल रहा है। शनिवार को डीएम ने इस मामले में भी जांच के आदेश जारी किए हैं। मेडिकल कालेज के प्राचार्य को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्लांट बंद होने के कारणों की जांच कर बताएं कि इसे ठीक कराने में क्या समस्या आ रही है। उन्होंने तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
तिर्वा सीएचसी में बॉयो कचरा जलाने और मेडिकल कालेज में बंद पड़े बॉयो मेडिकल वेस्ट प्लांट की जांच के आदेश दिए गए हैं। तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। बॉयो कचरा जलाने में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी।
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