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बारिश ने बढ़ाई कंपकंपी

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आशा ज्योति केंद्र के बाहर अलाव तापते लोग - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। रात दो बजे से शुरू हुई बारिश ने कंपकंपी बढ़ा दी। लोग ठिठुरते रहे। सर्दी से निजात पाने के लिए लोगों ने अलाव व हीटर का सहारा लिया। उधर, रात से सुबह तक हुई बारिश ने प्रमुख फसलों पर असर डाला है। सरसों, टमाटर, अरहर, आलू की फसल को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
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दिसंबर माह में बेमौसम बारिश ने कंपकंपी बढ़ा दी है। रात दो बजे से शुरू हुई रिमझिम बारिश सुबह तक जारी रही। सुबह करीब साढ़े नौ बजे आधा घंटे तक काफी तेज रफ्तार से पानी बरसा। दोपहर 12 बजे के लगभग बारिश का दोबारा झोंका आया। कुछ देर बाद बारिश बंद हो गई। सर्दी से बचाव के लिए लोगों ने हीटर और अलाव का सहारा लिया। बाजार में सुबह के समय सन्नाटा पसर गया। रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टैंड, जिला अस्पताल में लोग ठिठुरते नजर आए।
अस्पताल में भर्ती मरीजों का कहना है कि मरीजों को ओढ़ने के लिए दिया जाने वाला कंबल पतला है। इससे सर्दी से निजात नहीं मिलती। अधिकतर मरीज घरों से लाए कंबलों का प्रयोग कर रहे हैं। बारिश से आलू, मटर, सरसों सहित अन्य फूल वाली फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। जिला कृषि अधिकारी राम मिलन सिंह परिहार ने कहा कि बारिश से आलू, मटर, सरसों, अरहर की फसल को नुकसान पहुंचेगा। इन फसलों के फूल गिरने से उत्पादन गिरने की संभावना है। गेहूं के लिए यह बारिश वरदान साबित होगी।
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बारिश के बाद बढ़ाई रजाई, गद्दों की संख्या
तालग्राम। नगर पंचायत अध्यक्ष कुसुमा यादव के निर्देश पर शीत लहर से बचाने के लिए आठ नवंबर से अस्थायी रैन बसेरे का शुभारंभ किया गया। व्यवस्था के लिए नगर पंचायत कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। शुक्रवार से रजाई व गद्दों की संख्या बढ़ा दी गई है। कस्बे के सामुदायिक विकास केंद्र में ईओ घनश्याम राय ने नगर पंचायत से रजाई, गद्दे व रोशनी के साथ रैन बसेरा संचालित किया। इससे कि आने-जाने वाले यात्री, गरीब, असहाय रात में सर्दी से बचाव के लिए शरण ले सकें। नगर पंचायत लिपिक दीपक सविता को जिम्मेदारी दी गई है। शुक्रवारको रैन बसेरे के समीप अलाव जलवाने के लिए लकड़ी डलवाकर व्यवस्था कराई गई है।
बारिश से किसानों के चेहरों की उड़ी रंगत
कन्नौज/तालग्राम। दो दिन से हो रही बारिश से सरसों, अरहर, मटर, टमाटर की फसलें प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों के चेहरे की रंगत गायब है। आलू में भी झुलसा रोग की आशंका है। फूल वाली फसलों में खासा नुकसान है। ताहपुर के किसान वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बदरी व बारिश से सरसों में माहू व चेपा का प्रकोप हो सकता है। अगर मौसम तीन से चार दिनों तक ऐसा ही रहा और कोहरा शुरू हो गया तो तिलहनी फसल को नुकसान होगा। उत्पादन पर असर पड़ेगा। कैथनपुर्वा निवासी किसान रामचंद्र ने बताया कि सर्दी के मौसम में कुछ समय के अंतराल से हुई बारिश से टमाटर की फसल में फूल झड़ने की आशंका रहती है। फलों की वृद्धि रुक जाती है। सर्दी बढ़ने से फल फट जाते हैं। बाजार में सस्ते दामों पर बिक्री होती है। मटर में फफूंदी का प्रकोप हो जाता है। अरहर के भी फूल गिर जाते हैं। बिचपुर्वा निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि बारिश व बदरी के मौसम में झुलसा के आसार बढ़ जाते हैं। धूप न निकलने व बादल रहने से आलू में परपरा रोग लग सकता है। इससे उत्पादन गिर सकता है। चना की फसल को भी नुकसान होगा। चना कम सिंचाई वाली फसल है। दो बार पानी बरस चुका है। किसान नरेंद्र, संजय, शेर सिंह, सुरेश चंद्र, ओमशंकर का कहना है कि यह पानी गेहूं की फसल के लिए अच्छा है। सर्दी बढ़ने से गेहूं के किल्ले अधिक फूटेंगे और वृद्धि भी अच्छी होगी। शेष फसलों को इस बारिश से नुकसान है। कृषि प्राविधिक सहायक विनय शर्मा ने बताया कि आलू फसल में झुलसा रोग की आशंका है। किसान मैंकोजेब दवा का छिड़काव करें। फूल वाली फसलों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से दवा डालकर फसल का अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।
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