ये बच्चे देश का भविष्य है। इन्हें झुग्गी-झोपड़ी, गरीब, अनाथ समझकर शिक्षा से दूर मत करो। यह संदेश लेकर बीस सालों से साइकिल गुरू बच्चों को शिक्षा की धारा से जोड़ने के लिए प्रयासरत है आदित्य कुमार। दिल्ली जाते समय उन्होंने नगर में भी कई जगह साइकिल पाठशाला को रोककर शिक्षा का महत्व बताया।
फर्रुखाबाद के ग्राम सलेमपुर निवासी आदित्य कुमार ने जीवनभर नि:शुल्क शिक्षा देने का संकल्प लिया है। इसके चलते वह घर छोड़कर साइकिल पर चलता फिरता स्कूल लेकर शिक्षा की अलख जगाने के लिए निकल पड़े। उन्होंने बताया वह बच्चों को शिक्षित देखना चाहते हैं। इसीलिए यह यात्रा शुरू की है। बीस सालों से वह इस मुहिम में जुड़े है।
उन्होंने बताया वह अपनी साइकिल पाठशाला के जरिए पांच हजार से ज्यादा बच्चों को लखनऊ में शिक्षा मुहैया करा रहे हैं। लोग उनका नाम भूल गए और सिर्फ साइकिल वाले गुरूजी के नाम से जानने लगे हैं। साइकिल के पीछे लगे बैग में रखी कॉपी-किताबें और हैंडिल पर नि:शुल्क शिक्षा देने का बैनर लोगों को उनकी तरफ खींचती है।
उन्होंने बताया खर्चा चलाने के लिए वह घरों में अंग्रेजी की कोचिंग पढ़ाते हैं। उससे जो पैसा मिलता है उससे बच्चों के लिए कापी-किताबें, पेन-पेंसिल आदि की व्यवस्था करते हैं। अपने इस अभियान के तहत 12 जनवरी को उन्होंने लखनऊ के डीएम आवास से मिशन शिक्षा की विशाल महायात्रा दिल्ली के लिए शुरू की है। कानपुर, ग्रामीण क्षेत्र होते हुए फर्रुखाबाद, कन्नौज के बाद दिल्ली पहुंचेंगे। दिल्ली में प्रधानमंत्री, समाजसेवी अन्ना हजारे से मिलने की उनकी इच्छा है।
यह मिले सम्मान
साइकिल गुरू आदित्य कुमार को उनके इस सामाजिक कार्य के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स, यूनिक बुक वर्ल्ड रिकार्ड्स, बंडर बुक ऑफ इंटरनेशनल (लंदन), इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स, मिरेकल वर्ल्ड रिकार्ड्स, हाईरेंज बुक ऑफ वर्ल्ड, निशान-ए-ईमाम हुसैन अवार्ड, एवरेस्ट अवार्ड नेपाल, बुक ऑफ स्टेट रिकार्ड्स, तेलगु बुक ऑफ रिकार्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स (अमेरिका), बापू मेमोरियल एवार्ड आंधप्रदेश के अलावा उप्र के राज्यपाल और अनेकों प्रसिद्ध संस्थाओं से सम्मानित किए जा चुके हैं।